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जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर RCFEU और IREF में रोष ....

- कर्मचारी नेताओं पर दर्ज FIR वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को बिना शर्त रिहा करने की मांग  

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला   

RCFEU और इंडियन रेलवे एम्पलाइज फेडरेशन (IREF) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन करने जा रहे आम नागरिकों, कर्मचारियों, छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर गहरी चिंता और रोष व्यक्त किया है। संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने वाला कदम बताते हुए हिरासत में लिए गए सभी लोगों की तत्काल बिना शर्त रिहाई की मांग की है।

यूनियन और फेडरेशन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना और अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई चिंता का विषय है।

संगठनों के अनुसार, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे नागरिकों और नेताओं को कथित तौर पर विभिन्न स्थानों पर हिरासत में लिया गया तथा कुछ लोगों को नजरबंद करने और छापेमारी किए जाने की भी शिकायतें सामने आईं। बयान में ट्रेनों के रद्द होने, मेट्रो स्टेशनों के बंद होने, सड़कों पर घेराबंदी और भारी पुलिस बल की तैनाती का भी उल्लेख किया गया। संगठनों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले लोगों की आवाज को प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए दबाने का प्रयास किया जा रहा है। 

बयान में 25 नवंबर 2025 को पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली के लिए जंतर-मंतर पर किए गए प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया। संगठनों के मुताबिक, इंडियन रेलवे एम्पलाइज फेडरेशन (IREF), फ्रंट अगेंस्ट एनपीएस इन रेलवे (FANPSR) और नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) के बैनर तले हजारों रेल कर्मचारियों ने अनुशासित और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद IREF के राष्ट्रीय महासचिव सर्वजीत सिंह, सहायक सचिव रुपेश कुमार और NMOPS के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव विजेंद्र धारीवाल सहित अन्य कर्मचारी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

यूनियन और फेडरेशन ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलनों के माध्यम से अपनी मांगें उठाने वाले कर्मचारियों और नागरिकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करना उचित नहीं है। सरकार को विरोध की आवाज दबाने के बजाय संबंधित संगठनों के साथ बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करना चाहिए। 

RCFEU और IREF ने मांग की कि 10 अक्टूबर को दिल्ली में हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए। जंतर-मंतर पर आवागमन और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लेकर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएं तथा पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन के दौरान कर्मचारी नेताओं पर दर्ज एफआईआर वापस ली जाएं।

संगठनों ने सरकार से अपील की कि वह दमनात्मक कार्रवाई का रास्ता छोड़कर संविधान की मर्यादा के अनुरूप कर्मचारियों और नागरिकों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करे, ताकि उनकी जायज मांगों का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से किया जा सके। 

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