श्री गणेश चतुर्थी ... कल होगा गणपति जी का आगमन, पढ़ें स्थापना का उत्तम समय ..??
- 300 साल बाद लम्बोदर योग की बन रही स्थिति
- 31 अगस्त को गणपति जी की स्थापना के 5 उत्तम मुहूर्त
खबरनामा इंडिया ब्यूरो। पंजाब
कल 31 अगस्त गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले गणेश महोत्सव में गणेश जी की स्थापना पूजा के लिए दिन भर में कुल 5 शुभ मुहूर्त रहेंगे। सुबह 11:20 से दोपहर 1:20 तक का समय सबसे अच्छा रहेगा। क्योंकि इस वक्त मध्यान्ह काल रहेगा, जिसमें गणेश जी का जन्म हुआ था। यह जानकारी ज्योतिषाचार्य पंडित घनश्याम पांडे तथा पंडित राम सेवक ने देते हुए बताया कि गणपति भगवान की विधि विधान से की गई पूजा अर्चना से हर भक्त की मनोकामना संपूर्ण होती है।
पंडित राम सेवक ने कहा कि वैसे तो दोपहर में ही गणेश जी की स्थापना पूजा करनी चाहिए। समय नहीं मिल पाए तो किसी भी शुभ लग्न या चौघड़िया मुहूर्त में भी गणपति स्थापना की जा सकती है। वैसे भी इस बार गणेश चतुर्थी पर 300 साल बाद उत्तम ग्रहों की स्थिति बन रही है और लंबोदर योग भी है।
पंडित पंडित घनश्याम पांडे ने बताया कि इस बार गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश प्रतिमा की स्थापना के शुभ मुहूर्त सुबह 6 से 9 बजे तक, उसके बाद सुबह 10:30 से दोपहर 2 बजे तक, दोपहर 3:30 से शाम 5 बजे तक और शाम 6 से 7 बजे तक रहेगा। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि सुबह 11:20 से दोपहर 1:20 तक सबसे अच्छा मुहूर्त है। इसी मुहूर्त के दौरान गणेश जी का जन्म हुआ था।
उन्होंने कहा कि पूरे गणेश उत्सव में विघ्नविनाशक गणपति के सिर्फ तीन मंत्र का जाप करने से ही पुण्य मिलता है। सुबह नहाने के बाद गणेश जी के मंत्रों को पढ़कर प्रणाम करके ऑफिस दुकान या किसी भी काम के लिए निकलना चाहिए।
ज्योतिष आचार्य ने बताया कि गणपति भगवान को विघ्न विनाशक भी कहा जाता है इसलिए उनका आस्था और विधि विधान से किया पूजन तथा मंत्रों के जाप से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
- पढ़ें गणेश जी के मंत्र .....
1. वक्रतुण्ड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा
2. ॐ एकदन्ताय विद्धमहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात्
3. ॐ लम्बोदराय नमः
4. ऊँ गं गणपतये नम:
5. ऊँ श्री गणेशाय नम:
6. ऊँ नमो भगवते गजाननाय
ऊँ वक्रतुण्डाय हुम्
7. ॐ नमो सिद्धि विनायकाय सर्व कार्य कर्त्रे सर्व विघ्न प्रशमनाय सर्व राज्य वश्यकरणाय सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा ॥
8. ऊँ हीं श्रीं क्लीं गौं ग: श्रीन्महागणधिपतये नम:। ऊँ ।
9. हीं श्रीं क्लीं गौं वरमूर्र्तये नम: ।
ऊँ गं गणपतये नम:।
10. हीं श्रीं क्लीं नमो भगवते गजाननाय ।
ऊँ वक्रतुण्डाय हुम् ।
11.ॐ विघ्ननाशाय नमः
12. ॐ सुमुखाय नमः
13. ॐ गजकर्णकाय नमः
14. ॐ विनायकाय नमः
15. ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्॥
16. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥ एकदन्ताय विद्महे । वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

















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