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कपूरथला अदालत का फैसला-- विजिलेंस केस के आरोपी Sr. कॉन्स्टेबल को अग्रिम जमानत ..

- 2 लाख रुपये की कथित मांग से जुड़ा है मामला 

- अदालत ने कहा- फिलहाल हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत नहीं  

खबरनामा इंडिया ब्यूरो। कपूरथला   

कपूरथला की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गुरमीत टिवाना की अदालत ने रिश्वत मांगने के आरोपों का सामना कर रहे सीनियर कॉन्स्टेबल अमनदीप सिंह को अग्रिम जमानत दे दी है। वह पुलिस अधीक्षक (जांच) के कार्यालय में नायब रीडर के पद पर तैनात हैं। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ जमीन पर कब्जे से जुड़े विवाद और धोखाधड़ी की शिकायत के मामले में 2 लाख रुपये की कथित मांग को लेकर केस दर्ज किया था।

जानकारी अनुसार गत दिवस सुनाए गए आदेश में अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 482 के तहत दायर अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि इस स्तर पर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि मामले से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग पहले से ही पुलिस के पास मौजूद है और आरोपी ने जांच में सहयोग करने की इच्छा जताई है। 

बता दे कि यह मामला एफआईआर नंबर 22 से संबंधित है, जो 5 अक्टूबर 2026 को जालंधर रेंज के विजिलेंस ब्यूरो थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत दर्ज की गई थी। यह धारा 2018 के संशोधन के बाद लागू प्रावधानों के अंतर्गत आती है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता और सुरजीत सिंह के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के नाम पर कथित तौर पर पैसों की मांग की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सुरजीत सिंह ने शिकायतकर्ता पर कनाडा भेजने के बहाने 12 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था। इसके बाद शिकायतकर्ता को एसपी (जांच) के कार्यालय में बुलाया गया, जहां उसने अपनी खरीदी हुई जमीन पर कब्जे से संबंधित विवाद का भी जिक्र किया।

दो लाख रुपये मांगने का आरोप

अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में पेश विवरण के मुताबिक, रीडर सुखदेव सिंह ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से कहा कि यदि वह अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से बचना चाहता है, तो उसे पैसे देने होंगे। रकम के बारे में पूछने पर उसे नायब रीडर अमनदीप सिंह से मिलने के लिए कहा गया।

आरोप है कि अमनदीप सिंह ने शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने इतनी रकम देने में असमर्थता जताते हुए 10,000 रुपये देने की पेशकश की। उसने दावा किया कि उसके पास अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सबूत भी हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता ने बातचीत के दौरान अपने मोबाइल फोन पर ऑडियो रिकॉर्डिंग की थी। बाद में अमनदीप सिंह उसे कथित तौर पर एसपी के कमरे में ले गया। हालांकि, ये सभी आरोप अभियोजन पक्ष के दावे हैं और इनकी सत्यता का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना है।

विजिलेंस ने हिरासत में पूछताछ की मांग की

अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि एफआईआर विस्तृत जांच के बाद दर्ज की गई है। रिकॉर्ड की गई बातचीत की जांच और मामले के अन्य पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

वहीं, बचाव पक्ष ने रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों को खारिज किया। बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि शिकायतकर्ता स्वयं अमनदीप सिंह को एसपी (जांच) से मिलवाने ले गया था और कथित 2 लाख रुपये की मांग का संबंध शिकायतकर्ता तथा सुरजीत सिंह के बीच चल रहे विवाद से था।

बचाव पक्ष ने सुरजीत सिंह के एक हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता पर अभी भी 2 लाख रुपये बकाया हैं। इसके अतिरिक्त, बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उसके खिलाफ दर्ज पुराने आपराधिक मामलों और एक ऐसे मामले का उल्लेख किया, जिसमें उसे गवाही के दौरान पक्षद्रोही (होस्टाइल) घोषित किया गया था।

अदालत ने उपलब्ध सामग्री और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अमनदीप सिंह की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली। अग्रिम जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले की जांच जारी रहेगी और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा। 


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