पंजाब में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट झोटा की गोली मारकर हत्या के बाद तनाव ....
- मेडिकल स्टोर पर नशा बेचने के आरोप को लेकर हुआ विवाद
- केमिस्ट पर तीन गोलियां मारने का आरोप, चार साथी भी घायल
- 2023 से चल रही थी दोनों के बीच रंजिश, गुस्साए समर्थकों ने आरोपी की दुकान में की तोड़फोड़, मानसा बंद का ऐलान
खबरनामा इंडिया ब्यूरो। पंजाब
पंजाब के मानसा में आज मंगलवार को सुबह नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। झोटा की हत्या से गुस्साए परिजनों और समर्थकों ने सिविल अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया और मानसा शहर बंद करने का ऐलान कर दिया। वहीँ समर्थकों ने आरोपी की गिरफ्तारी होने तक अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया है।
जानकारी अनुसार, परविंदर सिंह झोटा मंगलवार सुबह फेसबुक पर लाइव होकर एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे। वह दुकानदार पर दवाइयों की आड़ में नशे से संबंधित सामान बेचने का आरोप लगा रहे थे। इसी बात को लेकर उनकी मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी के साथ बहस हो गई। आरोप है कि विवाद के दौरान अश्विनी ने झोटा पर तीन गोलियां चला दीं। इस घटना में एक्टिविस्ट झोटा के चार साथी भी गोली लगने से घायल हो गए।
बताया जा रहा है कि गोली लगने के बाद जब झोटा के साथी उन्हें वहां से ले जाने लगे तो आरोपी पिस्तौल लेकर उनके पीछे दौड़ा। कुछ देर बाद वह मेडिकल स्टोर बंद करके मौके से फरार हो गया।
पुलिस के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच वर्ष 2023 से रंजिश चल रही थी। उस समय परविंदर सिंह झोटा ने कथित तौर पर नशा बेचने के आरोप को लेकर इसी दुकानदार के गले में जूतों की माला पहनाकर उसे घुमाया था। माना जा रहा है कि इसी पुरानी रंजिश के चलते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। हालांकि हत्या के पीछे की वास्तविक वजह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
दूसरी तरफ झोटा की हत्या की खबर फैलते ही उनके परिजन और समर्थक मानसा सिविल अस्पताल के बाहर जमा हो गए। उन्होंने आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए शहर बंद का ऐलान किया और शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। समर्थकों ने झोटा का शव सौंपने की मांग की, लेकिन पुलिस ने शव उन्हें नहीं सौंपा। इस दौरान आक्रोशित लोगों ने आरोपी की मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ भी की।
वहीँ मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी के अनुसार आरोपी की तलाश की जा रही है। पुलिस ने आरोपी के परिवार के सदस्यों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। मामले की जांच जारी है।
उधर मुख्यमंत्री मान ने घटना के बाद सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों और SSP की उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। घटना ने पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और नशा तस्करी पर कार्रवाई को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि 30 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जालंधर में आयोजित रैली के दौरान पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए 31 दिसंबर 2029 की समयसीमा घोषित की थी। इस घोषणा के महज 13 दिन बाद नशे के खिलाफ सक्रिय रूप से आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या की घटना सामने आई है। इससे राज्य में नशे के खिलाफ अभियान की प्रभावशीलता और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।



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