संत सीचेवाल के प्रयास-- रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे युवक की 9 महीने बाद हुई वतन वापसी ...
- रूसी सेना में भर्ती कर फ्रंट लाइन पर भेजने का दावा, माइन धमाके में हुआ था घायल
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच करीब नौ महीने तक फंसे रहे पटियाला के युवक गगनदीप सिंह आखिरकार सुरक्षित भारत लौट आए हैं। स्टडी वीजा पर रूस गए गगनदीप का आरोप है कि कुछ साथियों ने करीब 2 लाख रुपये मासिक वेतन का लालच देकर उसे रूसी सेना में भर्ती करवा दिया। बाद में ट्रेनिंग देकर उसे युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया।
गगनदीप के अनुसार उसे बताया गया था कि सेना में उसे केवल बंकर तैयार करने जैसे काम करने होंगे, लेकिन कुछ समय बाद उसे सीधे फ्रंट लाइन पर भेज दिया गया। युद्ध के दौरान उसे यूक्रेन के अंदर राजधानी कीव तक ले जाया गया, जहां माइन धमाके में घायल होने के बाद उसे वापस भेज दिया गया।
राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के अनुसार, गगनदीप सिंह मई 2025 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। सितंबर 2025 के दौरान उसके कुछ साथियों ने उसे रूसी सेना में भर्ती कराया। गगनदीप के मुताबिक, उसे अच्छी सैलरी और अपेक्षाकृत सुरक्षित काम का भरोसा दिया गया था।
गगनदीप ने बताया कि रूसी सेना के साथ जो एग्रीमेंट साइन कराया गया, वह रूसी भाषा में था। भाषा की जानकारी नहीं होने के कारण उसे दस्तावेज में लिखी शर्तों की पूरी जानकारी नहीं थी।
गगनदीप के परिवार ने 20 जनवरी 2026 को संत सीचेवाल से संपर्क किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय को तीन बार पत्र लिखा और विदेश मंत्री से मुलाकात कर भी गगनदीप की सुरक्षित वापसी का मुद्दा उठाया।
उन्होंने संसद में भी रूसी सेना में फंसे भारतीय युवाओं की सुरक्षित वापसी का मुद्दा उठाए जाने की बात कही। लगातार प्रयासों के बाद गगनदीप 26 अगस्त 2026 को भारत लौटकर अपने परिवार से मिल सका।
“बंकर बनाने को कहा था, लेकिन फ्रंट लाइन पर भेज दिया”
भारत लौटने के बाद गगनदीप ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि युद्ध के हालात बेहद भयावह थे।
उसने बताया, “हमें कहा गया था कि सिर्फ बंकर बनाने हैं, लेकिन बाद में हमें फ्रंट लाइन पर लड़ने के लिए भेज दिया गया। वहां हर समय जान का खतरा था।”
गगनदीप के अनुसार, युद्ध के दौरान माइन धमाके में घायल होने के बाद उसे वापस भेज दिया गया। उस समय हालात इतने खराब थे कि उसने अपने परिवार के पास लौटने की उम्मीद तक छोड़ दी थी।
गगनदीप ने बताया कि रूसी सेना में शामिल होने के बाद मिलने वाली सैलरी उसके रूसी बैंक खाते में जमा होती रही, लेकिन वह रकम भारत ट्रांसफर नहीं कर सका। उसके मुताबिक, भर्ती के समय जिस वेतन का वादा किया गया था, उसका लाभ भी वह नहीं उठा पाया।
गगनदीप ने कहा कि कई महीनों तक वह ऐसे हालात में रहा जहां हर पल जान का खतरा बना हुआ था। एक समय उसे लगा कि शायद वह कभी अपने परिवार के पास वापस नहीं लौट पाएगा।
भारत लौटने पर उसने संत बलबीर सिंह सीचेवाल, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास का आभार जताया। उसने कहा कि लगातार किए गए प्रयासों के कारण ही उसकी सुरक्षित वतन वापसी संभव हो सकी।
युवाओं से बोला- किसी लालच में रूसी सेना में न जाएं
गगनदीप ने दावा किया कि रूसी सेना से जुड़े कई भारतीय और पंजाबी युवा अभी भी वहां फंसे हुए हैं। उसके मुताबिक, युद्ध में कुछ युवाओं की मौत भी हुई है और 50 से अधिक युवा अभी भी फंसे हो सकते हैं। उसने भारत सरकार से ऐसे युवाओं की पहचान कर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए तेजी से प्रयास करने की अपील की।
गगनदीप ने पंजाब के युवाओं को भी सावधान करते हुए कहा कि विदेश जाने या रूसी सेना में नौकरी के लालच में किसी ट्रैवल एजेंट या बिचौलिए के झांसे में न आएं। किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी शर्तों को अच्छी तरह समझें और यदि दस्तावेज किसी ऐसी भाषा में हो जिसे वे नहीं समझते, तो बिना जानकारी लिए उस पर हस्ताक्षर न करें।



.jpg)







.jpeg)














No comments