इंसेंटिव में कटौती के खिलाफ RCFEU की जनरल काउंसिल बैठक में जोरदार विरोध ....
- प्रशासन की नाकामी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने नहीं देंगे-- सर्वजीत सिंह
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री में आज आरसीएफ एम्पलाइज यूनियन की जनरल काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई। जिसमें आरसीएफ कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से जुलाई माह के इंसेंटिव में हुई भारी कटौती का मुद्दा बैठक में सबसे प्रमुख रहा। जनरल काउंसिल के सदस्यों ने इंसेंटिव कटौती को लेकर आरसीएफ प्रशासन के प्रति अपना कड़ा रोष और नाराजगी जाहिर की।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि RCF कर्मचारी पूरी मेहनत, लगन और जिम्मेदारी के साथ अपने निर्धारित कार्य को पूरा कर रहे हैं। कर्मचारियों ने उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय तक काम किया, लेकिन इसके बावजूद जुलाई माह में इंसेंटिव में कटौती किया जाना कर्मचारियों के साथ अन्याय है। यूनियन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की मेहनत और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक को संबोधित करते हुए RCFEU के कार्यकारी प्रधान मंजीत सिंह ने कहा कि जुलाई माह में इंसेंटिव कम आने के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इसके पीछे मुख्य कारण RCF प्रशासन की कार्यप्रणाली और सामग्री उपलब्ध करवाने में विफलता है।
मंजीत सिंह ने कहा कि कोच निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं करवाए जाने के कारण उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हुई। जब कोच निर्माण के लिए जरूरी सामग्री ही समय पर उपलब्ध नहीं होगी तो कोच समय पर गेट आउट कैसे होंगे? उन्होंने कहा कि प्रशासन को अपनी कमियों और नाकामियों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए, न कि अपनी गलती का बोझ मेहनतकश कर्मचारियों पर डालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आरसीएफ के कर्मचारी अपनी तरफ से पूरी मेहनत कर रहे हैं। कर्मचारी चाहते हैं कि आरसीएफ का उत्पादन बढ़े, ज्यादा से ज्यादा कोच बनें और फैक्ट्री मजबूत हो। लेकिन इसके लिए प्रशासन को भी अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और गंभीरता के साथ निभानी होगी।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासन अपनी नाकामी को छिपाने के लिए कर्मचारियों के इंसेंटिव में कटौती करके उन्हें दंडित करने की नीति अपनाता है तो आरसीएफ एम्पलाइज यूनियन इसका पुरजोर विरोध करेगी। कर्मचारियों की मेहनत का उचित सम्मान और उन्हें उनका जायज इंसेंटिव दिलाना यूनियन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मंजीत सिंह बाजवा ने कहा कि इस पूरे मामले में कुछ विरोधी यूनियनें भी स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी यूनियनें मौके का फायदा उठाकर आरसीएफ एम्पलाइज यूनियन को बदनाम करने और कर्मचारियों को गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि आरसीएफ कर्मचारी लंबे समय से यूनियन के काम और संघर्ष से परिचित हैं। कर्मचारियों को किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि आरसीएफ एम्पलाइज यूनियन ने हमेशा कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया है और भविष्य में भी कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई पूरी ताकत से जारी रखेगी।
RCFEU के महासचिव सर्वजीत सिंह ने कर्मचारियों को संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यूनियन बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से समस्याओं का समाधान चाहती है, लेकिन यदि प्रशासन कर्मचारियों की जायज मांगों को गंभीरता से नहीं लेता और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करता, तो यूनियन संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेगी।
सर्वजीत सिंह ने RCF प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष का रास्ता हमेशा खुला है। उन्होंने कहा कि इंसेंटिव का मुद्दा केवल एक महीने की कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों की मेहनत, उनके अधिकार और उनके भविष्य से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण विषय है।
उन्होंने कहा कि आरसीएफ में नई भर्ती, आउटसोर्सिंग, निजीकरण और इंसेंटिव जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर कर्मचारियों में लगातार चिंता है। यदि इन समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो यूनियन आने वाले समय में इन सभी मुद्दों को लेकर एक बड़ा और निर्णायक आंदोलन शुरू करेगी।
महासचिव सर्वजीत सिंह ने बताया कि आंदोलन की तैयारी को लेकर आरसीएफ के सभी डिविजनों की महत्वपूर्ण बैठक 17 अगस्त 2026 को बुलाई गई है। इस बैठक में कर्मचारियों से जुड़े सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और आगामी संघर्ष की रणनीति तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यूनियन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ लड़ाई लड़ना नहीं है, बल्कि आरसीएफ को मजबूत करना, कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना और फैक्ट्री में स्थायी रोजगार एवं सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना है।यूनियन ने आंदोलन के अगले कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि 18 अगस्त 2026 को डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर आरसीएफ प्रशासन और भारत सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इस दौरान कर्मचारियों की मांगों को लेकर नारेबाजी की जाएगी और प्रशासन तक कर्मचारियों की आवाज को मजबूती से पहुंचाया जाएगा। यूनियन ने आरसीएफ के सभी कर्मचारियों से इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
यूनियन ने कहा कि यदि इसके बावजूद प्रशासन ने कर्मचारियों की जायज मांगों और समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा।
इसके तहत आगे गेट मीटिंग, धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल और अधिकारियों के घेराव जैसे कार्यक्रम भी किए जाएंगे। यूनियन ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह कर्मचारियों के अधिकारों और आरसीएफ के हितों को केंद्र में रखकर किया ।आरसीएफ देश की महत्वपूर्ण उत्पादन इकाइयों में से एक है और यहां काम करने वाले कर्मचारियों ने वर्षों से अपनी मेहनत और कौशल के माध्यम से संस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए आरसीएफ के भविष्य और कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
यूनियन ने कहा कि आरसीएफ में स्थायी भर्ती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, अनावश्यक आउटसोर्सिंग पर रोक लगनी चाहिए, निजीकरण की नीतियों का विरोध किया जाना चाहिए और कर्मचारियों को उनकी मेहनत के अनुसार उचित इंसेंटिव मिलना चाहिए।
यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों को सुविधाएं और अधिकार देने के साथ-साथ प्रशासन को उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक सामग्री और संसाधन समय पर उपलब्ध करवाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि उत्पादन में किसी प्रकार की बाधा न आए और उसकी जिम्मेदारी कर्मचारियों पर न डाली जाए।
बैठक का संचालन आरसीएफ एम्पलाइज यूनियन के प्रेस सचिव अरविंद कुमार साह ने किया। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी कर्मचारियों और यूनियन सदस्यों का धन्यवाद करते हुए कहा कि आज के समय में कर्मचारियों की एकता सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने सभी आरसीएफ कर्मचारियों से अपील की कि यूनियन द्वारा घोषित 17 अगस्त की सभी डिविजनों की बैठक तथा 18 अगस्त के विरोध प्रदर्शन सहित आगामी सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
RCFEU ने अंत में स्पष्ट संदेश दिया कि कर्मचारियों के इंसेंटिव में कटौती, भर्ती, आउटसोर्सिंग और निजीकरण जैसे मुद्दों पर यूनियन चुप नहीं बैठेगी। यदि प्रशासन ने कर्मचारियों की जायज मांगों को स्वीकार नहीं किया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा तथा कर्मचारियों के हितों के लिए हर लोकतांत्रिक और संघर्षपूर्ण कदम उठाया जाएगा।
इस बैठक में आईआईटीएसए के प्रधान दर्शन लाल, जोनल सचिव जगतार सिंह, बलदेव राज, RCFEU के संगठन सचिव भारत राज, अतिरिक्त महासचिव अमरीक सिंह गिल, विचित्र सिंह, नरेंद्र कुमार, त्रिलोचन सिंह, तलविंदर सिंह, जगदीप सिंह, अवतार सिंह डीसीएम, अवतार सिंह, हरप्रीत सिंह, अश्विनी कुमार, गुरिंदर सिंह, संजीव कुमार, प्रभजोत सिंह, पंकज कुमार सिंह, शिवराज मीणा, हरिओम मीणा, भान सिंह और साकेत यादव शामिल हुए।




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