संत सीचेवाल ने भाई घनैया जी को ‘भारत रत्न’ देने की मांग उठाई ...
- सीचेवाल ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
राज्यसभा सदस्य संत सीचेवाल ने राज्यसभा में मानवता की निःस्वार्थ सेवा के प्रतीक भाई घनैया जी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की पुरजोर मांग उठाई। उन्होंने राजयसभा में भाई घनैया जी का जन्मदिवस 20 सितंबर को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की मांग भी की, ताकि देश की युवा पीढ़ी उनके सेवा, दया और मानव एकता के संदेश से प्रेरणा ले सके।
सीचेवाल ने सदन को संबोधित करते हुए संत सीचेवाल ने कहा कि आज दुनिया भर में मानवता की सेवा के लिए रेड क्रॉस जैसी संस्थाओं की सराहना की जाती है, लेकिन सिख इतिहास में सदियों पहले ही निःस्वार्थ मानव सेवा की एक अद्वितीय मिसाल कायम हो चुकी थी।
उन्होंने कहा कि दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के समय युद्ध के मैदान में भाई घनैया जी बिना किसी भेदभाव के घायल सैनिकों को पानी पिलाते थे। जब इस संबंध में गुरु साहिब ने उन्हें तलब किया तो भाई घनैया जी ने विनम्रता से कहा कि गुरु साहिब ने उन्हें हर इंसान में गुरु का स्वरूप देखने की शिक्षा दी है। इसलिए उन्हें प्रत्येक व्यक्ति में गुरु साहिब का ही रूप दिखाई देता है।
संत सीचेवाल ने बताया कि भाई घनैया जी के इस उत्तर और उनकी निःस्वार्थ सेवा से प्रसन्न होकर गुरु साहिब ने उन्हें घायलों की मरहम-पट्टी करने के लिए भी सामग्री उपलब्ध करवाई, ताकि युद्ध के मैदान में किसी भी घायल इंसान की सेवा से इनकार न किया जाए।
संत सीचेवाल ने कहा कि भाई घनैया जी की यह महान सेवा केवल सिख इतिहास की विरासत नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए दया, समानता, भाईचारे और निःस्वार्थ सेवा का सार्वभौमिक संदेश है। उनके जीवन ने धर्म, जाति, पक्ष तथा दुश्मन-मित्र के भेद से ऊपर उठकर प्रत्येक इंसान की सेवा करने का मार्ग दिखाया।
संत सीचेवाल ने कहा कि भाई घनैया जी के जीवन से यह शिक्षा मिलती है कि मानव जीवन का असली उद्देश्य निःस्वार्थ सेवा और दूसरों के प्रति दया की भावना रखना है। उन्होंने कहा कि ऐसी महान मानवतावादी शख्सियत को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करना और उनका जन्मदिवस राष्ट्रीय स्तर पर मनाना देश में सेवा, सद्भावना और मानव एकता की भावना को और मजबूत करेगा।



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