RCF वर्कर क्लब में विशेष विचार चर्चा ....
- मजदूर आंदोलन, सरकार, मीडिया का नैरेटिव और वास्तविक सच्चाई’ विषय पर मंथन
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
RCF वर्कर क्लब कपूरथला में आरसीएफ एम्पलाइज यूनियन, आईआरईएफ एवं एआईसीसीटीयू के संयुक्त तत्वावधान में "मजदूर आंदोलन, सरकार, मीडिया का नैरेटिव और वास्तविक सच्चाई" विषय पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक विचार चर्चा का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में RCF के कर्मचारियों, महिलाओं, नौजवानों और विभिन्न जन-संगठनों के प्रतिनिधियों ने भारी संख्या में भाग लेकर देश के मौजूदा हालातों और मजदूर वर्ग के संघर्षों पर गहराई से मंथन किया। कार्यक्रम की शुरुआत क्रांतिकारी गीतों और कविताओं से हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह में एक नया जोश भर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं प्रोफेसर डॉ. अतुल सूद ने अपने संबोधन में देश और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे श्रमिक आंदोलनों की जमीनी हकीकत को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने पानीपत, सिंगरौली, बरौनी, अल्ट्राटेक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, देहरादून और बठिंडा के मजदूर आंदोलनों का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि आज कॉरपोरेट जगत का मुनाफा तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं। देश में बेरोजगारी की दर चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। लगभग 61.5 करोड़ (615 मिलियन) कुल मजदूर बल में से करीब 34 करोड़ (340 मिलियन) लोग स्वरोजगार से जुड़े हैं, जिनकी मासिक आय मात्र 8,000 से 15,000 रुपये के बीच सिमट कर रह गई है।
प्रोफेसर सूद ने श्रम बाजार के ढांचागत संकट को उजागर करते हुए बताया कि संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कुल कर्मचारियों में से करीब 53.6 प्रतिशत लोग वास्तव में असंगठित श्रेणी की अमानवीय परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। अमेज़ॅन जैसी विशाल वैश्विक कंपनियों में भी मजदूरों को 15,000 रुपये के बेहद कम वेतन पर रखा जा रहा है। औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों से बिना किसी उचित ओवरटाइम के 14 से 16 घंटे तक कठोर शारीरिक श्रम लिया जाता है, जिसके एवज में उन्हें महज 18,000 से 19,000 रुपये थमाए जाते हैं। कार्यस्थलों पर हालात इतने बदतर हैं कि 14 से 16 घंटे की पाली के दौरान मजदूरों को पास मोबाइल फोन तक रखने की अनुमति नहीं होती और बात-बात पर बेइज्जती व अपमान झेलना पड़ता है।
साल भर जी-तोड़ मेहनत के बाद कर्मचारियों को सालाना वेतन वृद्धि के नाम पर केवल 31 से 32 रुपये की बढ़ोतरी दी जाती है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में 2014 के बाद से परिवर्तनशील महंगाई भत्ते (VDA) और न्यूनतम वेतन में कोई न्यायसंगत वृद्धि नहीं की गई है। डॉ. सूद ने नोएडा और मानेसर के ऐतिहासिक आंदोलनों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे सेक्टर 80 व 78 में लगभग 40,000 मजदूरों के शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा दमनकारी रवैया अपनाया गया और निर्दोष मजदूरों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने मुख्यधारा की मीडिया और सरकारी तंत्र द्वारा गढ़े जा रहे उस झूठे नैरेटिव की भी पोल खोली, जिसमें जनहित के आंदोलनों को दबाने या उनका स्वरूप बिगाड़ने का प्रयास किया जाता है।
कार्यक्रम के दौरान 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से न्याय की मांग कर रहे छात्र-नौजवानों और आंदोलनकारियों पर पुलिस द्वारा किए गए बर्बर लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में भर्त्सना की गई। वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में अपनी आवाज उठाना और न्याय मांगना कोई अपराध नहीं है, लेकिन वर्तमान सरकार तानाशाही रवैया अपनाते हुए हर जन-आंदोलन को लाठी और गोली के दम पर कुचलना चाहती है, जिसे देश का मेहनतकश समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस विचार चर्चा में सांस्कृतिक सहभागिता निभाते हुए शहीद भगत सिंह विचार मंच के संरक्षक सचिव गुरजिंदर सिंह, राजकुमार प्रजापति और छोटी बेटी कानू प्रिया ने अपनी ओजस्वी कविताओं और क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और संघर्ष का संदेश घर-घर तक पहुंचाया। कार्यक्रम का बेहतरीन और ऊर्जावान मंच संचालन साहिबजादा अजीत सिंह संस्थान के कोषाध्यक्ष अवतार सिंह ने बखूबी निभाया।
कार्यक्रम के अंत में आरसीएफ एम्पलाइज यूनियन के अध्यक्ष अमरीक सिंह ने दूर-दराज से आए सभी मजदूरों, महिलाओं, नौजवानों, कर्मचारियों तथा ओबीसी, एससी, एसटी एवं आईआरटीएसए (IRTSA) संगठनों के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। वहीं, आरसीएफ एम्पलाइज यूनियन के ऑर्गेनाइजेशन सेक्रेटरी भरत राज ने अपने संबोधन में कारखाने के मौजूदा हालातों, कर्मचारियों की समस्याओं और आने वाले दिनों में और अधिक तीखे संघर्षों की रूपरेखा पर विस्तार से अपनी बात रखी।
यूनियन के पदाधिकारियों ने उपस्थित कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों—जैसे उचित न्यूनतम वेतन, कार्यस्थल पर सुरक्षा, गरिमा और कानूनी संरक्षण—की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष की राह पर आगे बढ़ें। यह विचार चर्चा देश के वर्तमान हालात को समझने और मजदूरों के एकजुट संघर्ष को नई दिशा देने के संकल्प के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।



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