संत सीचेवाल ने महाराष्ट्र के CM को लिखा पत्र ....
- सचखंड श्री हज़ूर साहिब के प्रबंधन के लिए बने 1956 के अधिनियम में संशोधन न करने की अपील
- गृह मंत्री और प्रधानमंत्री से भी तत्काल हस्तक्षेप की मांग
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने सचखंड श्री हज़ूर साहिब के प्रबंधन के लिए बने वर्ष 1956 के अधिनियम में किसी भी प्रकार का संशोधन न करने की अपील करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है। उन्होंने इस पत्र की प्रतियां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजते हुए इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
संत सीचेवाल ने कहा है कि सिखों के धार्मिक मामलों में किसी भी प्रकार के सरकारी हस्तक्षेप से परहेज किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महाराष्ट्र सरकार इस मामले में आगे बढ़ती है तो इसका विरोध केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश-विदेश में बसे गुरु नानक नाम लेवा संगतों की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आ सकती है, जिसका सामना भाजपा सरकार को करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती और संवेदनशील राज्य है, जहां बड़ी कुर्बानियों के बाद शांति और सौहार्द स्थापित हुआ है। इसलिए सरकार को ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हों और प्रदेश का माहौल प्रभावित हो।
संत सीचेवाल ने अपने पत्र में जोर देकर कहा कि यह मामला सिख समुदाय के मूलभूत एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। सिख समुदाय अपनी धार्मिक संस्थाओं का प्रबंधन स्वयं करने में सक्षम है और इसमें किसी भी प्रकार के सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लिखा कि जब तख्त श्री हज़ूर साहिब के प्रबंधकों ने गुरमत्ता पारित कर महाराष्ट्र सरकार द्वारा वर्ष 1956 के अधिनियम को समाप्त कर नया कानून लाने के प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है, तो सरकार को इस विधेयक को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।
संत सीचेवाल ने कहा कि सिख संस्थाओं की स्वायत्तता में हस्तक्षेप के प्रयासों का संगतों ने हमेशा डटकर विरोध किया है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2015 से भी महाराष्ट्र सरकार ने तख्त श्री हज़ूर साहिब के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने के प्रयास किए थे। उन्होंने यह भी बताया कि फरवरी 2024 में महाराष्ट्र सरकार एक ऐसा संशोधन लाना चाहती थी, जिसके तहत तख्त श्री हज़ूर साहिब के 17 सदस्यीय बोर्ड में से 12 सदस्यों तथा अध्यक्ष को सीधे नामित करने का अधिकार सरकार को मिल जाता। लेकिन सिख संगतों और धार्मिक संस्थाओं के तीव्र विरोध के कारण सरकार को वह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा था।
संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने अपने पत्र में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि भारत की आज़ादी के लिए सिख समुदाय ने सबसे अधिक बलिदान दिए हैं। उन्होंने कहा कि सिख गुरुधामों का प्रबंधन सिख समुदाय हमेशा स्वयं करता आया है और इसमें किसी भी प्रकार के सरकारी हस्तक्षेप का संगतों ने हर समय विरोध किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना महामारी के दौरान सिख समुदाय द्वारा निःस्वार्थ सेवा की जो मिसाल पेश की गई, उसकी पूरे विश्व ने सराहना की।

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