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संत सीचेवाल ने रक्षा मंत्री और शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र

- पंजाब के आर्मी स्कूलों में पंजाबी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में न पढ़ाए जाने का मुद्दा गरमाया 

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला   

राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के आर्मी स्कूलों में पंजाबी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में न पढ़ाए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पंजाब एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है, इसलिए यहां भाषा और संस्कृति से जुड़े मामलों में नए प्रयोग करने से बचना चाहिए। 

संत सीचेवाल ने कहा कि पंजाबी मातृभाषा का मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है और यह पंजाबियों की भावनाओं तथा उनकी पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने उल्लेख किया कि नई शिक्षा नीति में भी स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने और प्राथमिकता देने की बात कही गई है, लेकिन इस मामले में सीबीएसई द्वारा उस भावना की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पंजाब भाषा (संशोधन) अधिनियम, 2008 की भावना और प्रावधानों के भी विपरीत है। 

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के तहत जो विद्यार्थी पंजाबी भाषा पढ़ना चाहते हैं, उन्हें भी संस्कृत विषय को अनिवार्य रूप से चुनने की सलाह दी जा रही है। यह स्थिति विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए असमंजस पैदा कर रही है। 

संत सीचेवाल ने अपने पत्रों में पंजाब के लोगों की ओर से मांग उठाई है कि राज्य के सभी आर्मी स्कूलों में पहली कक्षा से दसवीं कक्षा तक पंजाबी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाना सुनिश्चित किया जाए। 

उन्होंने पत्र में लिखा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, जहां मातृभाषा पंजाबी की रक्षा और सम्मान के लिए पहले भी अनेक आंदोलन और संघर्ष हो चुके हैं। पंजाब लंबे समय तक अशांत परिस्थितियों का सामना कर चुका है। उन्होंने कहा कि जब पंजाब की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन चल रहे थे, तब उनमें पंजाबी भाषा तथा पंजाबी भाषी क्षेत्रों से संबंधित मुद्दे भी प्रमुख रूप से शामिल थे। इसलिए भाषा से जुड़े विषयों को अत्यंत संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ देखा जाना चाहिए। 

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