रूस की जंग ने उजाड़ा पंजाब का घर, 8 महीनों से बेटे की राह देख रहा परिवार ....
- सांसद संत सीचेवाल से मिलकर पीड़ित परिवार ने लगाई मदद की गुहार
- स्टडी वीजा पर सपने लेकर गया था युवक, अब युद्ध के अंधेरों में लापता पंजाब का लाल
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने रूस की सेना में शामिल होकर पिछले 8 महीनों से लापता पंजाबी युवक का पता लगाने के लिए केंद्रीय विदेश मंत्री तक मामला पहुंचाया है। अमृतसर जिले की रहने वाली नवदीप कौर ने निर्मल कुटिया, सुल्तानपुर लोधी पहुंचकर संत सीचेवाल को बताया कि उनके पति हीरा सिंह अक्टूबर 2024 में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मॉस्को गए थे। वहां अगस्त 2025 में उन्हें रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया।
परिवार के अनुसार भर्ती के समय हीरा सिंह को भरोसा दिया गया था कि उनके खाते में तुरंत 14 लाख रुपये भेजे जाएंगे और हर महीने ढाई लाख रुपये वेतन मिलेगा।
नवदीप कौर ने बताया कि केवल 15 दिनों की सैन्य ट्रेनिंग के बाद ही उनके पति को युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। जबकि भर्ती के समय यह कहा गया था कि उनसे केवल सेना के लिए भोजन पहुंचाने और बंकर बनाने जैसे कार्य ही लिए जाएंगे। उनका कहना है कि हीरा सिंह मानसिक रूप से युद्ध लड़ने के लिए तैयार नहीं थे।
उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में उनकी अपने पति से आखिरी बार बात हुई थी। उसके बाद पिछले 8 महीनों से उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया है।
नवदीप कौर का 6 वर्षीय बड़ा बेटा सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिसका फिलहाल पूरी तरह इलाज संभव नहीं माना जाता। यह बीमारी बच्चे की गतिविधियों, मांसपेशियों और आवाज को प्रभावित करती है तथा उम्र बढ़ने के साथ दिमाग पर असर और बढ़ता जाता है। उनका दूसरा बच्चा ढाई साल का और तीसरा केवल एक साल का है। बड़ा बेटा न बोल सकता है, न सुन सकता है, न बैठ सकता है और न ही चल-फिर सकता है।
अपनी बीमार संतान को सीने से लगाकर सिरिंज से पानी पिलाती नवदीप कौर की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। बच्चे को रोटी भी बेहद छोटे टुकड़ों में खिलानी पड़ती है। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया।
संत सीचेवाल ने नवदीप कौर को भरोसा दिलाया कि उनके लापता पति का पता लगाने के लिए विदेश मंत्रालय और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री राहत कोष से बीमार बच्चे के इलाज की व्यवस्था करवाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया जाएगा और वे जहां तक पढ़ना चाहेंगे, उनकी शिक्षा जारी रखी जाएगी।



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