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पासपोर्ट दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार की राज्यसभा में गूंज ....

- संत सीचेवाल ने पासपोर्ट दफ्तरों के भ्रष्टाचार को किया बेनकाब  

- पिछले पांच वर्षों में 30 अधिकारी निलंबित, 97 के खिलाफ कार्रवाई शुरू 

खबरनामा इंडिया ब्यूरो। कपूरथला     

राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा पासपोर्ट दफ्तरों में लोगों की हो रही परेशानी, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और शोषण के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया गया। सरकार ने स्वीकार किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में 30 पासपोर्ट अधिकारियों को निलंबित किया गया है और 97 अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। 

संत सीचेवाल द्वारा लिखित प्रश्न के माध्यम से केंद्र सरकार से पूछा गया था कि पिछले 5 वर्षों के दौरान देश के पासपोर्ट दफ्तरों और पासपोर्ट सेवा केंद्रों में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही उन्होंने पासपोर्ट दफ्तरों में लोगों के शोषण के मुद्दे को गंभीरता से उठाया। 

विदेश मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा दिए गए उत्तर के अनुसार, 2021 से 2025 के दौरान भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में कई कार्रवाइयां की गई हैं। उन्होंने बताया कि इस अवधि में 30 अधिकारियों को निलंबित किया गया, 97 अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू की गई, 13 पर छोटी सज़ाएं और 2 पर बड़ी सज़ाएं दी गईं। सरकार ने यह भी बताया कि देशभर में 19 पासपोर्ट दफ्तरों की जांच की गई। 

विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए जवाब में बताया गया कि जालंधर के पासपोर्ट दफ्तर में इस दौरान 2 अधिकारियों को निलंबित किया गया, जबकि 2 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की स्वीकृति प्रक्रिया शुरू की गई। इसी तरह चंडीगढ़ में 1 अधिकारी को निलंबित किया गया और 1 के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। इन मामलों में मदुरै और मुंबई से सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। मदुरै में 29 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि मुंबई में 15 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई और 3 अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। 

इस मौके पर संत सीचेवाल ने कहा कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि आम लोगों की इज्जत और अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट बनवाने जैसी बुनियादी सेवा के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं और कई बार उन्हें रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जाता है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि पासपोर्ट सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, दलाल प्रणाली को खत्म किया जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। 

उन्होंने जोर देकर कहा कि “देश के नागरिकों को अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए किसी भी प्रकार की परेशानी या शोषण का सामना न करना पड़े।” 

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