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लोकसभा में महिला आरक्षण बिल नहीं हो सका पास ...

पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े, 54 वोट की रही कमी 

खबरनामा इंडिया बबलू। नई दिल्ली   

लोकसभा में आज महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार पास नहीं करवा सकी है। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। वहीँ काफी लम्बी चली चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। जिसमे पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। 

जबकि बिल पास करवाने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। जिसमे 528 का दो तिहाई 352 बनता है। इस तरह यह महिला आरक्षण बिल 54 वोट की कमी के चलते पास नहीं हो सका। बता दे कि लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।  

16 अप्रैल से शुरू हुए इस सत्र का आज दूसरा दिन है। इस सत्र का उद्देश्य लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 तक करने के लिए परिसीमन और महिला आरक्षण पर चर्चा है। कुल सीटों की 33 फीसदी सीटों महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। यह व्यवस्था 15 सालों के लिए लागू की जाएगी और संसद चाहे तो इसे बढ़ा सकती है। 

हालाँकि सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए जिसमे पहला परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और दूसरा केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 था। सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। सरकार ने कहा कि यह बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है। 

यह भी बताने योग्य है कि मोदी सरकार के 12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई हो। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।   

राहुल गांधी ने कहा कि हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।  

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