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जंग के हालातों में संत सीचेवाल के प्रयासों से, दुबई से एक पंजाबी की हुई सुरक्षित वापसी ...

- रात के अंधेरे में ही शारजाह से भरी उड़ान दवारा वापिस आया जालंधर वासी व्यक्ति  

- बेगुनाह होने के बावजूद काटी जेल, काम करने के बावजूद नहीं मिली तनख्वाह  

- 6 दिसंबर से परिवार से टूटा हुआ था संपर्क  

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला   

खाड़ी देशी में जंग के हालातों के चलते शारजाह से रात के अंधेरे में दिल्ली के लिए भरी गई उड़ान के जरिए सुखविंदर सिंह की सुरक्षित वापसी संभव हो सकी। खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए जारी प्रयासों के दौरान राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल की अहम भूमिका सामने आई है। 

जालंधर के गांव महमूवाल वासी सुखविंदर सिंह ने आज सुल्तानपुर लोधी स्थित निर्मल कुटिया पहुंचकर संत सीचेवाल का आभार जताया है। और मीडिया के सामने अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि वह 2020 में रोजगार की तलाश में दुबई गए थे, जहां एक कंपनी ने उनके साथ धोखाधड़ी की। कंपनी ने उनका पासपोर्ट अपने कब्जे में रख लिया और तीन साल काम करवाने के बावजूद उन्हें केवल पांच महीने की तनख्वाह दी गई। बाद में झूठे आरोप लगाकर उन्हें कानूनी मामलों में फंसा दिया गया, जिसके चलते उन्हें बिना किसी गलती के जेल जाना पड़ा। 

उन्होंने यह भी बताया कि जेलों में अभी भी कई भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, जो ओवरस्टे या झूठे मामलों के कारण परेशान हैं और उनके साथ खराब व्यवहार किया जा रहा है। 6 दिसंबर से उनका अपने परिवार के साथ संपर्क पूरी तरह टूट चुका था, जिससे उनके परिवार को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। छोटे बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी उनकी पत्नी के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी। 

सुखविंदर सिंह ने कहा कि यदि संत सीचेवाल की मदद न मिलती, तो वह आज भी वहां जेल में फंसे रहते। उनकी पत्नी द्वारा संत सीचेवाल से संपर्क करने के बाद ही उनकी रिहाई संभव हो सकी। उन्होंने सरकार से अपील की है कि उनकी बकाया तनख्वाह भी दिलवाई जाए, क्योंकि केस उनके पक्ष में आने के बावजूद उन्हें पूरा न्याय नहीं मिला है। 

इस मौके पर संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास का धन्यवाद करते हुए कहा कि विदेशों में फंसे हर भारतीय की मदद करना हमारी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “जंगी हालातों के कारण विदेशों में रह रहे भारतीयों और उनके परिवारों में डर और चिंता बढ़ रही है। सरकार को चाहिए कि ऐसे मामलों को प्राथमिकता देकर फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द वापस लाया जाए और उनके अधिकारों की रक्षा की जाए।” उन्होंने यह भी मांग की कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों के साथ हो रही धोखाधड़ी और अत्याचार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।  

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