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बैसाखी के मौके पर गुरु नानक नामलेवा संगतो के लिए बड़ा तोहफा ..... ??

- 24 साल बाद बाबा नानक की बेईं हुई प्रदूषण मुक्त  

- संगत की कई दशकों की सेवा रंग लाई -- संत सीचेवाल  

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला      

गुरबानी के आगमन स्थल के रूप में विख्यात पवित्र काली वेई के तट पर 100 प्रतिशत उपचार संयंत्र स्थापित किए गए हैं। पवित्र वेई अब लोगों के सहयोग से प्रदूषण से मुक्त होने वाली देश की पहली नदी बन गई है। बैसाखी पवित्र वेई की ढलानों पर 5 स्थानों पर मनाई जाती है। जिस दौरान बड़ी संख्या में देश-विदेश से संगतें इसकी भट्टी में जल भरकर उसमें स्नान करती हैं। पवित्र वेई की सफाई के साथ एक बड़ा उपहार यह देखने को मिल रहा है कि पंजाब की 165 किमी लंबी नदी लंबे समय के बाद अपने प्राचीन स्वरूप में बहने लगी है।

बैसाखी की पूर्व संध्या पर बधाई देते हुए पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि भक्तों द्वारा की गई दशकों की सेवा रंग लाई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में यह पहली बैसाखी है जब इस नदी में गंदा पानी नहीं गिर रहा है और यह लबालब बह रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से वेई में 350 क्यूसेक पानी भी छोड़ा गया है।  

उल्लेखनीय है कि वेई में 43 गांवों और 11 कस्बों में 54 स्थानों से गंदा पानी आता था। पिछले 24 वर्षों से वेईं में नियमित रूप से प्रवाहित होने वाले अपशिष्ट जल को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके परिणामस्वरूप, अब गांवों और शहरों से सीवेज को साफ करने के लिए सभी उपचार संयंत्र वेनई में स्थापित किए गए हैं और अंतिम उपचार संयंत्र भी सैदोभुलाने की कॉलोनियों के पास स्थापित किया गया है।  

बाबा नानक की पवित्र वेई पिछले ढाई दशक से गंदे नाले में तब्दील हो गई थी। उसके पास से गुजरना बहुत मुश्किल था। होशियारपुर और कपूरथले जिलों का गंदा पानी इसमें गिरता था और वर्ष 2000 के दौरान यह एक गंदे कूड़ेदान से ज्यादा कुछ नहीं था। यह 165 किमी लंबी है और वेई ब्यास नदी की एक सहायक नदी है। जो होशियारपुर जिले के मुकेरियां इलाके से निकलता है।  

करीब 24 साल पहले पर्यावरण प्रेमी बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल ने इलाके की संगतों के साथ मिलकर इसकी कारसेवा शुरू की थी। 2006 में वेणई की कारसेवा डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम का ध्यान इस बात ने भी आकर्षित किया कि वह 17 अगस्त 2006 को पवित्र वेणई के दर्शन के लिए सुल्तानपुर लोधी आए थे। स्वतंत्र भारत में यह पहला उदाहरण था जब किसी देश का राष्ट्रपति लोगों द्वारा साफ की गई नदी को देखने आया। उस समय वेई में पानी का निरंतर प्रवाह बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन लंबे संघर्ष के बाद बाबा नानक की यह पवित्र वेई अब निरंतर बह रही है। जहां इसका पानी सामान्य मोटरों के पीने के पानी से भी अधिक स्वच्छ है। 

पवित्र वेई के 5 गांवों गालोवाल, भुलत्थ, नानकपुर, सुल्तानपुर लोधी और अहली कलां में बैसाखी मनाई जाएगी। पर्यावरणविद संत बलबीर सिंह की ओर से हर साल बैसाखी को लेकर की जाने वाली तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 

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