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कपूरथला के किसानों को सरफेस सीडिंग तकनीक बारे किया जायगा प्रेरित .....

- सरफेस सीडिंग तकनीक से बोए गए गेहूं के खेतों का निरीक्षण करने पहुंची ADC शिखा  

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला    

कपूरथला में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी द्वारा जिले में सरफेस सीडिंग तकनीक से बोए गए गेहूं के खेतों का जायज़ा लेते हुए संबंधित किसानों से मिल रहे हैं, ताकि इस तकनीक से धान की पराली की संभाल कर बोए गए गेहूं की फसल की सफलता के बारे में अन्य किसानों को भी प्रेरित किया जा सकता है।   

कपूरथला के ब्लॉक सुल्तानपुर लोधी के गांव सराय जटां में सरवन सिंह के खेतों में सरफेस सीडर मशीन से बोए गए गेहूं के खेत का निरीक्षण अतिरिक्त ADC (जनरल) शिखा भगत ने कृषि विभाग की टीम को साथ लेकर किया गया। ADC ने कहा कि आज हमें धान की पराली के प्रबंधन के लिए ऐसी तकनीक की जरूरत है, जिससे धान की पराली का उचित प्रबंधन हो सके और किसानों की लागत भी कम हो।  

उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी प्लांट में खेत दिवस आयोजित करने का उद्देश्य किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ सरफेस सीडर मशीन से बोई गई गेहूं की फसल के प्रदर्शन की जानकारी लेना है ताकि भविष्य में पराली के प्रबंधन के लिए किसान हितैषी योजना बनाई जा सके।   

इस अवसर पर उपस्थित मुख्य कृषि अधिकारी कपूरथला डॉ. बलबीर चंद ने कहा कि सरफेस सीडर मशीन से धान की पराली को बिना जलाए, बिना जुताई के खेतों में ही रखकर गेहूं की बिजाई की गई थी। इस तकनीक से गेहूं की बुआई पर खर्च कम आता है और खरपतवार भी कम हो जाते हैं। जमीन का तापमान भी अनुकूल रहता है।  

इस अवसर पर संबंधित किसान ने जानकारी देते हुए बताया कि धान की कटाई के बाद सरफेस सीडर मशीन से गेहूं की बुआई करने पर किसान ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि इस तकनीक से बुआई करने पर गेहूं के पौधे की जड़ें प्रभावित नहीं होती हैं अन्य गेहूँ बोने की विधियाँ मजबूत होती हैं और हवा चलने  से पौधा क्षतिग्रस्त होने पर भी फसल गिरती नहीं है। खरपतवार कम हो जाते हैं और पानी की उपजाऊ शक्ति में सुधार होता है। इस अवसर पर कृषि अधिकारी डॉ. बलकार सिंह, कृषि विकास अधिकारी डॉ. गुरविंदर सिंह, डॉ. विशाल कौशल और कृषि विस्तार अधिकारी परमिंदर कुमार, गुरविंदर सिंह, किसान स्वर्ण सिंह आदि मौजूद थे।   

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