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बाढ़ प्रभावित 55 गांवों के लोगों ने राज्यसभा सांसद सीचेवाल से की मांग .....

- बाढ़ से तबाह नौचों के पुनर्निर्माण किया जाए   

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला    

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के 55 से अधिक गांवों ने आज एकजुट होकर राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल और शाहकोट के आप प्रभारी राजिंदर पंडोरी से मांग की और कहा कि गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल के नीचे 18 से 20 फीट तक जमी हुई गाद हटाई जानी चाहिए। लोगों ने कहा कि वह प्रशासन की लापरवाही के कारण विस्थापित नहीं होना चाहते हैं।  

यह मांग पत्र उन्होंने आज सतलुज के धूसी बांध पर चल रही श्री अखंड पाठ साहिब की लड़ी के दौरान दो पाठों के भोग के बाद संत सीचेवाल को सौंपा है। उल्लेखनीय है कि क्षेत्र के लोगों द्वारा अकाल पुरख का शुक्रिया अदा करने के लिए 03 मार्च से श्री अखंड पाठ साहिब के पाठों का लड़ी शुरू की गयी है। इस दौरान रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं और बाढ़ के दौरान अहम भूमिका निभाने वाले लोगो को क्षेत्र की ओर से सम्मानित किया जा रहा है।    

संत सीचेवाल ने प्रशासनिक अधिकारियों को क्षेत्र की इस मांग को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुसीबत के समय लोगो की इतनी बड़ी भीड़ और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी को देखकर बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों में काफी उत्साह है।  

उन्होंने कहा कि गट्टा मुंडी कासु गांव मंडला छना गांवों के पास 2 जगहों पर बांध टूट गए थे, जो सभी पंजाबियों ने रिकॉर्ड समय में बनाए थे। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीनों में पड़े गड्ढों को भरने के लिए शुरू की गई कारसेवा के तीसरे चरण के दौरान सतलुज नदी के धूसी बांध पर फिर से मेले जैसा माहौल बना हुआ है। पूरे पंजाब से युवा फिर से इस सेवा में भाग लेने के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने संगत से अपील की कि यह क्षेत्र अब उस त्रासदी से काफी हद तक उबर चुका है, संगत यहां जरूर पहुंचे और अपना सम्मान ले।

गट्टा मुंडी कासू, भानेवाल, मंडला, मुंडी चौलिया, मुंडी शहरिया, चक वडाला समेत दर्जनों गांव हैं जो जालंधर जिले से संबंधित हैं। वे सतलुज नदी के ठीक किनारे पर हैं। इन गांवों में बरसात के मौसम में बांध टूटने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।  पिछले साल 2023 के दौरान गट्टा मुंडी कासू गांव के पास बांध टूटने से इन गांवों को काफी नुकसान हुआ था और इसी तरह साल 2019 के दौरान आई बाढ़ के दौरान पंजाब सरकार को 1200 करोड़ का नुकसान हुआ था। 

ग्रामीणों की पुरजोर मांग है कि सतलुज नदी में बाढ़ से तबाह हुई नोचो का पुनर्निर्माण किया जाए। धूसी बांध के किनारे पत्थर के स्टड और स्पर का निर्माण किया जाना चाहिए क्योंकि ये स्टड/स्पर और नॉच धूसी बांध की सुरक्षा में मदद करते हैं। बाढ़ आए आठ माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक इन पायदानों को बनाने का काम शुरू नहीं हो सका है। मुख्य बस्ती का विकास नहीं होने से यहां के लोग आज भी संकट में हैं।  वहां पढ़ने वाले स्कूली बच्चों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है।  

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