कपूरथला की स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी को लगाया 2.50 लाख रुपये जुर्माना ...
- 50 हजार मानसिक प्रताड़ना व अदालत खर्च के 11 हजार रुपये अलग से देने के निर्दश
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
कपूरथला की स्थायी लोक अदालत ने रेलिगेयर स्वास्थ्य बीमा कंपनी को 2.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें 50 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना और 11 हजार रुपये अदालत खर्च भी शामिल है। आदेश में अदालत ने दो माह में पीड़ित की तीन लाख रुपये की कुल रकम पर 9 प्रतिशत ब्याज के दर से अदा करने के निर्देश हैं, जोकि 2.5 लाख रुपये बनते हैं। यदि बीमा कंपनी दो माह में रकम अदा नहीं करती है तो उसे पीड़ित को कुल रकम पर 12 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से अदा करने होंगे।
आवेदक कविता अग्रवाल वासी मोहब्बत नगर कपूरथला के पति स्वर्गीय सुनील अग्रवाल ने अपने और अपने परिवार से नियमित चिकित्सा बीमा प्राप्त की थी और उनकी मृत्यु के समय उन्हें रेलिगेयर स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से संरक्षित किया गया था सुनील अग्रवाल स्वस्थ थे, लेकिन कुछ समय बाद वे अस्वस्थ हो गए और पटेल अस्पताल जालंधर में इलाज करवाया, जहां वह 14 जून 2017 से 21 जून 2017 और 2 जुलाई 2017 से 3 जुलाई 2017 तक अपनी मृत्यु तक भर्ती रहे।
आवेदक ने अपनी बेटी के साथ अस्पताल में रेलिगेयर अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन कंपनी के अधिकारी ने यह कहते हुए मामला लेने से इंकार कर दिया कि यह मामला गंभीर बीमारी का है और उसे इसका खर्च खुद करना होगा। आवेदक जो पहले से ही मानसिक पीड़ा से गुजर रही थी, उसे अस्पताल की ओर से मांगी गई राशि जमा करनी पड़ी। जिसके बाद में बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि डॉक्टर की रिपोर्ट के अनुसार उसका पति शराब पीने का आदी और लंबे समय से धूम्रपान करने वाला था।
आवेदक ने समाधान के लिए अपने सभी प्रयास किए, लेकिन बीमा कंपनी ने दावे का निपटान करने से इंकार कर दिया। इसलिए आवेदक ने अपने वकील एडवोकेट अनुज आनंद के माध्यम से स्थायी लोक अदालत कपूरथला का दरवाजा खटखटाया। बीमा कंपनी ने दलील दी कि शिकायत करने वाली महिला का पति लंबे समय से धूम्रपान करता था, जिसे वे साबित नहीं कर सके।
स्थायी लोक अदालत कपूरथला ने मामले में समझौता करवाने की कोशिश की, लेकिन दोनों पक्षों के बीच मामले में समझौता नहीं हुआ। आवेदक और प्रतिवादी दोनों के दस्तावेजी साक्ष्य और लिखित और मौखिक तर्कों के आधार पर मुकेश बंसल, डॉ. मनजीत कौर और डॉ. उपासना वर्मा की पीठ ने पाया कि आवेदक दावे का पूरा हकदार था और उसने उत्तरदाताओं को मुआवजा, क्षति का भुगतान करने के लिए भी उत्तरदायी ठहराया और रेलिगेयर स्वास्थ्य बीमा कंपनी को आवेदक कविता अग्रवाल को उक्त रकम अदा करने के निर्देश दिए हैं।















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