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पंजाब भाजपा में तनाव ...... पूर्व मंत्री अनिल जोशी ने कारण बताओ नोटिस के जवाब में 2 पेज का दिया जवाब, प्रदेश अध्यक्ष से पूछे 5 सवाल ...????

- उन्होने तीनों नए खेती कानूनों या केंद्र के खिलाफ कभी बयानबाजी नहीं की -- जोशी   

पूछा -- किसानों की बात रखना क्या अनुशासनहीनता है ?  

खबरनामा इंडिया ब्यूरो। अमृतसर, पंजाब

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लागू किये गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ खड़े किसानों का पक्ष लेने वाले भाजपा नेता व पूर्व मंत्री अनिल जोशी और प्रदेश भाजपा के बीच चल रहा तनाव फ़िलहाल जारी है। अनिल जोशी को दो दिन पहले पंजाब भाजपा के महसचिव सुभाष शर्मा द्वारा भेजे कारण बताओ नोटिस के जवाब में जोशी ने भी 2 पेज का जवाब दे दिया है। और अपने जवाब में उन्होंने प्रदेश भाजपा प्रधान अश्वनी शर्मा से 5 सवाल भी पूछे है। 

बता दे कि दो दिन पहले पूर्व केबिनेट मंत्री अनिल जोशी को महासचिव सुभाष शर्मा के लेटर पेड़ पर किसानो के पक्ष में दिए बयानों के हवाला देकर संघठन में अनुसाशन हीनता किये जाने के कारण नोटिस भेजा गया था। और दो दिन में जवाब भी माँगा था। जोशी ने भी उक्त नोटिस का 2 पेज का लिखित जवाब भेज दिया है। 2 पेज के अपने जवाब में जोशी ने लिखा है कि उन्होंने तीनों नए खेती कानूनों या केंद्र के खिलाफ कभी बयानबाजी नहीं की। उन्होंने हमेशा पार्टी के हित में बोला है। 

जोशी ने खबरनामा इंडिया से हुई वार्ता में यह भी कहा था कि उन्होंने सबसे पहले अपने विचार पार्टी के मंच पर ही रखे थे। साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओ पर हो रहे हमले और कार्यकर्ताओ को पेश आ रही दिक्कतों पर चर्चा करने के लिए भाजपा की तरफ से विधानसभा चुनाव लड़ चुके या लड़ने वाले सभी संभावित 23 दावेदारों की बैठक बुलाने का सुझाव दिया था। मगर उनके इस सुझाव को भी अनदेखा कर दिया गया।

जोशी ने अपने 2 पेज के जवाब में लिखा है कि प्राथमिक स्तर पर जब किसान पंजाब में आंदोलन कर रहे थे तो उनकी मांगें बहुत सीमित थीं। अगर उसी समय किसानों से वार्ता कर मामला सुलझा लिया जाता तो यह आंदोलन देशव्यापी नहीं होता। अपने जवाब के अंत में जोशी ने पंजाब भाजपा के प्रधान अश्वनी शर्मा को पंजाब के किसानों, व्यापारियों व मजदूरों के साथ मजबूती से खड़े होने और उनकी समस्याओं का हल करवाने की सलाह दी है।

जोशी ने कारण बताओ नोटिस के जवाब में पंजाब भाजपा से पूछे यह 5 सवाल....  

पंजाब के किसानों की बात करना क्या अनुशासनहीनता है ?

पंजाब में भाजपा कार्यकर्ताओ को किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। इसे रोकने के लिए किसानों का सहयोग करने की बात करना क्या अनुशासनहीनता है ?

पार्टी कार्यकर्ता संगठन को छोड़कर जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी को बचाने के लिए सुझाव देना क्या अनुशासनहीनता है ?

पंजाब के आढ़तियों, शैलर मालिकों, उद्योगपतियों, छोटे-बड़े व्यापारियों और मजदूरों की बात करना क्या अनुशासनहीनता है ?
पंजाब के भाईचारे में आ रही दरार को भरने की कोशिश करना क्या अनुशासनहीनता है ?


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