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निगमीकरण का विरोध ..... ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का निगमीकरण देश हित में नहीं -- IREF

- निजीकरण के बाद लखनऊ एयरपोर्ट पर कई सेवाओं के रेट 10 गुना से अधिक बढ़ा दिए गए 

खबरनामा इंडिया बबलू कपूरथला 


केंद्र सरकार द्वारा तानाशाही तरीके से देश की 41 ऑर्डिनेंस (गोला बारूद) फैक्ट्रीयों को ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड तोड़कर सात निगमों में तब्दील करने के फैसले का इंडियन रेलवे एम्पलाईज फेडरेशन पुरजोर विरोध करती है। इन शब्दों के साथ मीडिया से मुखातिब होते हुए सर्वजीत सिंह, महासचिव, इंडियन रेलवे एम्पलाईज फेडरेशन व आरसीएफ एम्पलाईज यूनियन ने कहा कि हमारा स्पष्ट रूप में मानना है कि निगमीकरण देश हित में नहीं है और निगमीकरण असल में निजीकरण एक रूप होता है। 
उन्होंने कहा के निजीकरण, उदारीकरण, वैश्वीकरण के 30 वर्षों के इतिहास ने विकास के उन सब दावों व वादों की पोल खोल कर रख दी है जो समय की हकूमत ने देश के लोगों के साथ किए थे। ना देश में रोजगार के अवसर बड़े, ना गरीबी कम हुई, ना भ्रष्टाचार कम हुआ, ना महंगाई कम हुई। उल्टा जो हालात इन 30 वर्षों में पैदा हुए हैं उस कारण देश के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। परंतु केंद्र सरकार चंद पूंजीपतियों की कठपुतली बन सभी लोकतांत्रिक परंपराओं को कुचल अंधाधुंध निजीकरण के रास्ते चल रही है। निजीकरण की उदाहरण देते हुए साथी सर्वजीत सिंह ने कहा कि एयरपोर्टों के निजीकरण के बाद अडानी ने लखनऊ एयरपोर्ट पर बिना कुछ किए धरे सेवाओं के रेट 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ा दिए हैं। निजीकरण के बाद हर क्षेत्र में ऐसा होना बिल्कुल तय है।
सर्वजीत सिंह ने कहा 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीयां सधारण गोला बारूद से लेकर मिसाइलें, तोपें, रॉकेट लॉन्चर, बख्तरबंद गाड़ियां आदि का उच्च गुणवत्ता का उत्पादन कर देश की सुरक्षा में अहम योगदान दे रही हैं। और तो और करोना संकट के दौरान वेंटिलेटर, पीपीई किट बनाकर देश के लोगों से करोना महामारी से भी बचाने का बेहतरीन कार्य भी किया है। उन्होंने कहा ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीयों का निजीकरण देश की सुरक्षा से गंभीर रूप में खिलवाड़ करना है। उन्होंने कहा कि रक्षा मामलों की स्थाई संसदीय कमेटी ने भी ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीयों को निगमों में बांटने का पुरजोर विरोध किया है।
साथी सर्वजीत सिंह ने कहा कि यह देश के लिए चिंता की बात है कि केंद्र सरकार ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीयों की ट्रेड यूनियनों से बात करना तो दूर देश के लोगों या पार्लिमेंट में भी कोई चर्चा नहीं की। बल्कि ट्रेड यूनियनों को इस आश्वासन कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री को निगमों में तब्दील नहीं किया जाएगा के बावजूद तानाशाही कर निगमीकरण का फरमान जारी कर दिया गया है जिसके खिलाफ ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीयों के सभी कर्मचारी, सभी यूनियन व सभी फैडरेशन मिलकर संघर्ष के मैदान में हैं। उन्होंने कहा कि हम इंडियन रेलवे एम्पलाईज फेडरेशन की ओर से उनके संघर्ष का पुरजोर समर्थन करते हैं और कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ हैं। उन्होंने देश भर के मेहनतकश लोगों को एकजुट होकर उनका समर्थन करने की अपील करते हैं।

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