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वैबिनार ....... वातावरण को संतुलित बनाये रखने में सांपो की है अहम भूमिका -- यश सिंह

- पूरे विश्व में लगभग 3600 प्रजातियो के सांप पाए जाते है, भारत में करीब 300

खबरनामा इंडिया ( गगनदीप ), कपूरथला 

भारत में हर वर्ष बहुत से लोगों की मौत सांप के डसने से होती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आम जन साधारन को यह बताया जाए कि सांपों से कैसे बचाव करना है। और कौन-कौन की सावधानियां रखी जानी चाहिए। उक्त विचार प्रसिद्ध जंगली जीव फोटोग्राफर और सांपों की देखभाल के प्रति अग्रसर यश सिंह ने साइंस सिटी की ओर से सांपों की खोज के विषय पर करवाए गए वैबिनार दौरान किया। इस वैबीनार में करीब 400 विद्याॢथयों व अध्यापकों ने हिस्सा लिया। 

यश सिंह ने  बताया कि पूरे विश्व में सांपों की लगभग 3600 प्रजातियां पाई जाती है। भारत में करीब 300 से अधिक प्रकार के सांप पाए जाते है। अन्य सांपों की प्रजातियों को तलाशने का काम अभी भी जारी है। बहुत से लोग नई-नई तकनीकों का प्रयोग करके सांपों की किस्म की देखभाल की ओर अग्रसर है। यह देखा गया कि सांपों के डसने की घटनाएं अधिकतर तब होती है। जब उनको मारने की कोशिश की जाती है। यदि सांपों को ऐंकात में छोड़ दिया जाए और उनको मारने की कोशिश न की जाए, तो वह हमारे के लिए खतरनाक नहीं है। केवल अपने बचाव के लिए ही डंक मारते है। 

इस मौके संबोधित करते साइंस सिटी की डायरैक्टर जनरल डा. नीलिमा जैरथ ने कहा कि जीवों की सभी प्रजातियों का भोजन बड़ा ही उलझनदार और अहम है। जो कि इनकी जन जनसंख्या के संतुलन को बनाई रखता है। जैसे यदि सांप न होंगे, तो सांपों का भोजन बनते कई प्रकार की शिकार प्रजातियों में अस्वभाविक तौर पर बहुत अधिक बढ़ौतरी हो जाएगी। जिससे पर्यावरण स्थिरता नष्ट हो जाएगी और इसके साथ ही सांपों का शिकार करने वाले भी भूखे मर जाएंगे। उन्होंने कहा कि जैविक-विभिन्नता हमारी सेहत और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है। सांप जैविक-विभिन्नता के साथ साथ प्राकृति का भी अहम हिस्सा है। 

नीलिमा जैरथ ने कहा कि अलग-अलग खेतों में सांपों की किस्मों की अलग-अलग है। जैसे कि पर्यावरण के अनुसार मारुस्थल में अलग, हर-भरे घास वाले क्षेत्रों में अलग प्रकार के और जंगली क्षेत्रों में अलग प्रकार के सांप पाए जाते है। सांपों की बहुत सी प्रजातियों ने इंसान के साथ रहना सिख लिया और अब हमें समझना चाहिए कि हम भी सांपों के साथ सुरक्षित रह सकते है। 

इस मौके साइंस सिटी के डायरैक्टर डा. राजेश ग्रोवर भी उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि अब सांप के डंसने व सांप विरोधी जहर (ऐंटी स्नेक ) दवाईयां भी आसानी से मिलने लगी है। जिनके साथ सांप के डंसने का इलाज हो सकता है। इसलिए ऐसी घटना घटित होने पर पीडि़त व्यक्ति को जल्द से जल्द इलाज के लिए अस्पताल में ले जाना चाहिए। 

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