Breaking ....... पूर्व डीजीपी एसएस सैनी को हाईकोर्ट से झटका, याचिकाएं खारिज, किसी भी वक्त गिरफ्तारी संभव
- दो जजों द्वारा सैनी की याचिकाओं को सुनने से इंकार के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस फतेहदीप सिंह ने की सुनवाई, सभी पक्षों को करीब पांच घंटे सुनने के बाद मंगलवार तक सुरक्षित रखा था फैसला
बलवंत सिंह मुल्तानी अपहरण व हत्या के 29 साल पुराने मामले में नामजद पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की अग्रिम जमानत और केस की राज्य से बाहर किसी स्वंतत्र एजेंसी से जांच करवाने की मांग वाली दोनों याचिकाओं को मंगलवार को हाईकोर्ट के जस्टिस फतेहदीप सिंह की अदालत ने खारिज कर दिया है। वहीँ अब पूर्व डीजीपी की गिरफ्तारी किसी भी समय होने की संभावना बनी हुई है।
बताने योग्य है कि सैनी की याचिकाओं को सुनने से दो जजों द्वारा इंकार के बाद सोमवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस फतेहदीप सिंह ने सुनवाई कर दोनों याचिकाओं पर सभी पक्षों को करीब पांच घंटे सुना और फैसला मंगलवार तक सुरक्षित रख लिया था। आज सुबह-सुबह सैनी को हाईकोर्ट ने बड़ा झटका देते हुए दोनों याचिकाएं ख़ारिज कर दी है।
यह भी बताने योग्य है कि अडिशनल जिला एवं सेशन जज रजनीश गर्ग की अदालत द्वारा अग्रिम जमानत रद्द करने के बाद सैनी ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की शरण लेकर अग्रिम जमानत की मांग की थी। इसकी सुनवाई पिछले हफ्ते शुक्रवार को जस्टिस सुवीर सहगल के पास होनी थी। परन्तु उन्होंने सुनवाई करने से इंकार करते हुए मामले को चीफ जस्टिस को भेज आग्रह किया था। कि इसे किसी दूसरे बेंच को सुनवाई के लिए भेज दिया जाए। इससे पूर्व बुधवार को जस्टिस अमोल रतन सिंह ने भी सैनी की इसी मामले में सीबीआई अथवा पंजाब से बाहर किसी अन्य निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग पर सुनवाई से इंकार कर दिया था।
जानकारी अनुसार याचिका में सैनी ने बताया था कि एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी गुरमीत सिंह पिंकी के आरोप के बाद उनके खिलाफ 29 साल पुराने मामले में एफआईआर आर दर्ज की गई है। यह पूरा मामला राजनीतिक रंजिश के चलते उन्हें फंसाने के लिए दर्ज किया गया है। इस मामले में 11 मई को मोहाली की जिला अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी। जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर में में हत्या की धाराओं को जोड़ दिया। और 1 सितंबर को मोहाली अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। सैनी द्वारा दायर याचिका में मोहाली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग की गई थी।










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