जन समस्या ----- अफसरों के नाक के तले सड़कों पर काबिज हो रही है जंगली घास
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कपूरथला के आफिसर कालोनी के पार्क बेहाल, जंगली घांस के कारण सड़को से निकलना हो रहा मुश्किल
खबरनामा इंडिया। (संजीव भल्ला), कपूरथला
"दिए
तले अंधेरा" इस लोकप्रिय मुहावरे का सबसे बढ़िया उदाहरण अगर खबरनामा इंडिया के पाठक देखना चाहतें हैं तो कपूरथला
के आफिसर कालोनी का एक दौरा जरूर कीजिए। आपको सड़क के दोनो ओर आदमकद जंगली घास खड़ी नजर
आएगी जो पैदल आने जाने वालो के लिए परेशानी का सबब बन हुई हैं।
खबरनामा इंडिया। (संजीव भल्ला), कपूरथला
अफसर कॉलोनी के इस
क्षेत्र में प्रशासन से जुड़े कई उच्च अधिकारी तो रहतें ही हैं जिन में कपूरथला के एसडीएम, एडीसी,
जज और एसएसपी प्रमुख हैं। और नजदीक ही बचत
भवन, एक स्कूल, सरकारी कॉलेज, बीएसएनएल की टैलिफोन एक्सचेंज और विरसा विहार को जाना हो तो भी इन्हीं
घास से भरपूर सड़कों से निकलना पड़ता है।
कालोनी
के बाहर मौजूद इकलौता पार्क, जो कभी चिल्ड्रन पार्क के नाम से जाना जाता था
उस पर भी रख रखाव के अभाव में जंगली घास ने कब्जा कर लिया है। पार्क के झूले और बाकी
लगे ड्रिल उपकरण पूरी तरह से टूटे हुएं हैं या जंग लगने से खराब हो चुकें हैं। शायद
ही कोई बच्चा इस पार्क का प्रयोग करता हो, अलबत्ता नशा करनें
वालों या अनैतिक काम करने वालों को यह क्षेत्र बढ़ा रास आ रहा है।
क्षेत्र में मौजूद पार्क का उद्घाटन फरवरी 1995 में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री जगजीत सिंह ने किया था और किसी समय यह क्षेत्र की शान हुआ करता था।
क्षेत्र में मौजूद पार्क का उद्घाटन फरवरी 1995 में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री जगजीत सिंह ने किया था और किसी समय यह क्षेत्र की शान हुआ करता था।
लोगों
को हैरानी है कि प्रशासन से जुड़े सभी उच्च अधिकारी रोजाना इधर से गुजरते हैं पर
उन्हें कभी भी इस क्षेत्र की दुदर्शा नजर नहीं आती। पार्क की रेलिंग भी बुरी तरह
से टूट चुकी है।
मोहब्बत नगर निवासी सुखविंदर सिंह के अनुसार जब भी वह पैदल इस सड़क से गुजरते हैं तो उन्हें
डर लगा रहता है कि कोई खतरनाक कीड़ा मकौड़ा घास से निकल कर काट न ले।
स्कूल
अध्यापिका नीना अरोड़ा ने कहा कि सरकार के पास मनरेगा के अंदर काफी पैसा आता है
जिस के तहत काम करवा का वह सड़कों से घास व बूटी को साफ करवा सकतें हैं ताकि क्षेत्र
की खूबसूरती बहाल हो।
राहगीरों
के अनुसार इस घास का प्रयोग नशा करने वाले भी करतें हैं और उन्हें अक्सर आते जाते
झाड़ियों में घुस कर हाथ से घास मलते देखा जा सकता है।
गृहिणी
जसबीर कौर ने बताया कि वह स्टेट गुरूद्वारा जाने के लिए रोजाना इस क्षेत्र से पैदल
निकलती हैं। हालांकि इस सड़क से ट्रैफिक चलता रहता है फिर भी सड़क के दोनों और उगी
घास के कारण असामाजिक तत्वों की ओर से किसी भी शरारत का अंदेशा बना रहता है।













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