जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह और एसजीपीसी अध्यक्ष की 'खालिस्तानी बोल' पर शिरोमणि अकाली दल खामोश, उठ रहे कई सवाल
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) अध्यक्ष की 'खालिस्तान' की खुली हिमायत का पंजाब में कहीं तीखा तो कहीं धीमा विरोध शुरू हो गया है। प्रकाश सिंह बादल, प्रधान सुखबीर सिंह बादल और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल फिलहाल खामोश हैं।
वरिष्ठ पत्रकार अमरीक,खबरनामा इंडिया। पंजाब
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) अध्यक्ष की 'खालिस्तान' की खुली हिमायत का पंजाब में कहीं तीखा तो कहीं धीमा विरोध शुरू हो गया है। इतना तूफान खड़ा होने के बाद भी शिरोमणि अकाली दल, उसके सरपरस्त प्रकाश सिंह बादल और प्रधान सुखबीर सिंह बादल एवं राज्य के हर घटनाक्रम पर बयानबाजी के लिए तत्पर रहने वालीं केंद्रीय मंत्री हसरत कौर बादल फिलहाल खामोश हैं, लेकिन बादल दल से जुदा हुए पुराने खांटी अकाली सियासतदान, जत्थेदार के खालिस्तानी-अलगाववादी बयानों से सहमत नहीं हैं। अलबत्ता शुरु से ही अलगाववादी राजनीति करने और खालिस्तान का झंडा उठाने वाला अमृतसर अकाली दल जरूर खुलकर ज्ञानी हरप्रीत सिंह और भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल के साथ है। चर्मपंथी नेता और पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान इसकी अगुवाई करते हैं।
राज्यसभा सांसद और कुछ महीने पहले शिरोमणि अकाली दल (बादल) को छोड़कर टकसाली अकाली दल में शामिल होने वाले सुखदेव सिंह ढींडसा कहते हैं, "समझ से परे है कि राज्यसभा सांसद और कुछ महीने पहले शिरोमणि अकाली दल (बादल) को छोड़कर टकसाली अकाली दल में शामिल होने वाले सुखदेव सिंह ढींडसा कहते हैं, "समझ से परे है कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार और एसजीपीसी प्रधान ने अचानक यह मुद्दा क्यों उठाया? जबकि इस वक्त सबसे ज्वलंत मुद्दा फसलों के मंडीकरण के बहाने राज्यों से उनके अधिकार छीने जाने का है। इसके अलावा पानी, भाषा विवाद, राजधानी आदि प्रमुख मुद्दे हैं। खालिस्तान की बात करने की बजाय जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह और भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल को जरूरी और ज्वलंत मुद्दे उठाने चाहिएं।" अकाली-बीजेपी गठबंधन सरकार में वित्त मंत्री रहे और अपने पिता की राह पर चलते हुए बादल दल को अलविदा कहने वाले परमिंदरजीत सिंह ढींडसा भी ठीक ऐसा ही मानते हैं। उन्हें इस प्रकरण पर बादलों की चुप्पी बेहद संदेहास्पद लगती है। वह कहते हैं कि सीनियर-जूनियर दोनों बादलों को सामने आकर धुंधलका साफ करना चाहिए। तख्त श्री दमदमा साहिब के समानांतर जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल का साफ मानना है कि एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपनी राजनीति के लिए श्री अकाल तख्त साहिब का दुरुपयोग किया है। दादूवाल के मुताबिक, "बीजेपी अब बादलों को किनारे कर रही है। इसलिए मोदी सरकार और बीजेपी को डराने के लिए बादलों ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार का इस्तेमाल किया है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह और भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल अपने दम पर इतना बड़ा कदम नहीं उठा सकते। यह सब उन्होंने बादलों की हिदायत और शह पर किया है। कौम के आगे खालिस्तान से भी अहम मसले दरपेश हैं। जत्थेदार को पहले उन पर बोलना चाहिए।"










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