नदियों के प्रदूषण को रोकने के लिए धार्मिक नेताओं को आगे आना होगा-- जस्टिस अफरोज़ .....
- पवित्र काली बेईं कार सेवा की 26वीं वर्षगांठ पर पर्यावरण सम्मेलन
- - संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब की छोटी नदियों को बचाने का दिया
- हर काम के मशीनीकरण ने इंसान को भी मशीन बना दिया-- बीबी इंदरजीत कौर
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
पवित्र काली बेईं की कार सेवा की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित पर्यावरण सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के न्यायमूर्ति अफरोज़ अहमद ने कहा कि देश की नदियों और जलधाराओं को प्रदूषण तथा अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए समाज के हर वर्ग, विशेषकर धार्मिक नेताओं, को आगे आना होगा। उन्होंने बताया कि एनजीटी ने पंजाब सहित कई राज्यों में नदी की भूमि का सीमांकन कर अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस अफरोज़ अहमद ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण में नदियों से जुड़े लगभग 12,000 मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में नदी बेसिनों और तालाबों पर हुए अवैध कब्जों को हटाने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा के लिए न्यायपालिका पूरी गंभीरता से कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि अमरोहा नदी बेसिन पर बने एक डिग्री कॉलेज भवन को गिराने के आदेश दिए गए हैं। वहीं नोएडा के गौतम नगर में एक तालाब पर हुए अवैध कब्जे का सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को तीन माह के भीतर कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं तथा पालन न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पंजाब के बुद्धा नाला मामले में भी एनजीटी ने अतिक्रमण संबंधी रिपोर्ट तलब की है।
सम्मेलन के दौरान संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब के लोगों से अपील की कि वे छोटी नदियों, चोओं और अन्य जल स्रोतों की रक्षा के लिए जन आंदोलन खड़ा करें। उन्होंने कहा कि काली बेईं की सफाई केवल एक अभियान नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है। नदी की सफाई जितनी महत्वपूर्ण है, उसकी निरंतर देखभाल और संरक्षण उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बुद्धा नाला भी शीघ्र ही काली बेईं की तरह स्वच्छ होकर बहेगा।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने जल संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि संत सीचेवाल ने बिना किसी बड़े बजट या सरकारी योजना के केवल दृढ़ संकल्प और जनभागीदारी से काली बेईं को पुनर्जीवित कर देश के सामने एक मिसाल पेश की है।
पिंगलवाड़ा की प्रमुख बीबी इंदरजीत कौर ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और प्लास्टिक के अंधाधुंध उपयोग ने पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने लोगों से प्लास्टिक का उपयोग छोड़कर प्रकृति से जुड़ने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर काम के मशीनीकरण ने इंसान को भी मशीन बना दिया है।
शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने कहा कि इस्लाम में जल संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने समाज सेवा के लिए समय का सदुपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा संत सीचेवाल द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बुद्धा नाला की सफाई के कारण अगस्त 2025 में लुधियाना में बाढ़ नहीं आई।
संत गुरमीत सिंह खोसा कोटला तथा संत सेवा सिंह के प्रतिनिधि ने वृक्षों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रत्येक व्यक्ति से अपने जीवन में कम से कम 51 पेड़ लगाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
अन्य वक्ताओं ने भी पवित्र काली बेईं को पुनः निर्मल धारा बनाने के लिए पिछले 26 वर्षों से समर्पित संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों की सराहना की। उल्लेखनीय है कि काली बेईं कार सेवा की 26वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित समारोहों की शुरुआत इस पर्यावरण सम्मेलन से हुई।
कार्यक्रम के अंत में संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने सभी अतिथियों का सम्मान किया। इस अवसर पर एसडीएम जसजीत सिंह, बेगम सादिया यासमीन, डॉ. आशीष जेटली, डॉ. रूबल कनोजिया, डॉ. जसबीर सिंह पटियाला, एडवोकेट बलबीर सिंह बिलिंग, आसा सिंह घुम्मण, अमरिंदरजीत सिंह, परमजीत सिंह मानसा, बलबीर सिंह, बाबा दीपक सिंह, संत बग्गा सिंह, संत गुरमेज सिंह, प्रो. कुलविंदर सिंह, तजिंदर सिंह, गुरविंदर सिंह, हरदेव सिंह, बूटा सिंह, जोगा सिंह, गुरदेव सिंह, गुरविंदर कौर, जसवंत सिंह, क्षेत्र के पंच-सरपंच, पार्षद तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।




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