गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल के नीचे से मिट्टी निकालने में तेजी लाई जाए– गोयल
- सीचेवाल खेल मेले में खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया
- पौधों की नर्सरी के साथ-साथ पंजाब में ‘खिलाड़ियों की नर्सरी’ तैयार करने पर जोर
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल के नीचे जमा गाद (मिट्टी) को निकालने के कार्य में तेजी लाएं। वे आज गांव सीचेवाल में चल रहे खेल मेले में शामिल होने के बाद निर्मल कुटिया में ड्रेनेज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आने वाले दिनों में मिट्टी निकालने के लिए लगाए गए टिप्परों की संख्या बढ़ाई जाए।
राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल के ध्यान में लाया कि सतलुज दरया के जालंधर वाले हिस्से में गांव मंडाला छन्ना के पास 16 करोड़ रुपये की लागत से पत्थर लगाकर बांध को मजबूत किया गया है। लेकिन यदि नदी के पानी को क्रीक के माध्यम से नदी के बीच की ओर नहीं मोड़ा गया और रेलवे पुल के नीचे से मिट्टी नहीं निकाली गई, तो विभाग द्वारा लगाए गए 16 करोड़ रुपये के पत्थर भी बाढ़ को रोकने में सक्षम नहीं होंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे पुल के नीचे से मिट्टी निकालने के कार्य की गति बहुत धीमी है। यदि इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो पुल के नीचे से पानी की निकासी के लिए रास्ता साफ करना मुश्किल हो जाएगा।
संत सीचेवाल ने बताया कि वर्ष 2023 में भी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना था कि पंजाब में बाढ़ का इतिहास अगस्त या सितंबर का रहा है, लेकिन वर्ष 2023 में बाढ़ ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे और 10-11 जुलाई की रात को ही बाढ़ आ गई थी। उस समय इस क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी।
उल्लेखनीय है कि गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल के नीचे से मिट्टी निकालने के लिए लगभग 40 टिप्पर लगाए गए हैं। मिट्टी निकालने के कार्य के लिए केवल 30 जून तक का समय बचा है। जबकि गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल में कुल 21 मेहराब (दरे) हैं, जिनमें 15 से 18 फुट तक गाद जमा है। इनमें से अभी आधे मेहराब भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाए हैं।
राज्यसभा सदस्य संत सीचेवाल ने मंत्री गोयल के ध्यान में यह भी लाया कि यदि नदी से मिट्टी निकालने के कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो बरसात से पहले गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल के नीचे से पानी की निकासी कठिन हो जाएगी, जिससे यह क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ सकता है।



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