ब्रेकिंग न्यूज़

भारतीय दूतावास ने दुबई में कंपनी के चंगुल से छुड़वाया पंजाबी युवक ...

- संत सीचेवाल की पहल पर इकलौता बेटा मां के पास सकुशल लौटा  

- रोज़ी-रोटी कमाने दुबई गए युवक को माता-पिता भेजते रहे खर्चा  

- जंग जैसे हालातों में वापसी की उम्मीद छोड़ चुका था युवक, सायरनों की आवाज़ आज भी कानों में गूंजती 

- कंपनी ने पासपोर्ट भी जब्त किया और वेतन भी नहीं दिया  

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला    

पंजाब के भोले-भाले युवाओं को एजेंटों द्वारा ठगने का सिलसिला लगातार जारी है। जालंधर के गांव सोफी निवासी लवप्रीत सिंह ने कभी सोचा भी नहीं था कि माता-पिता के सिर पर चढ़े कर्ज को उतारने के लिए दुबई जाकर उसे अपनी रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए भी घर से पैसे मंगवाने पड़ेंगे। ड्रोन और मिसाइलों के साये में बिताए चार महीनों को याद कर आज भी लवप्रीत सिहर उठता है। उस भयावह माहौल में उसने भारत लौटने की उम्मीद तक छोड़ दी थी। 

लवप्रीत सिंह ने बताया कि वहां सायरन बजते ही सब कुछ बंद हो जाता था और आज भी उन सायरनों की आवाज़ उसके कानों में गूंजती रहती है। दुबई में जिस कंपनी में उसने चार महीने काम किया, उसने न केवल उसका वेतन रोके रखा बल्कि उसका पासपोर्ट भी जब्त कर लिया ताकि वह वहां से भाग न सके। 

करीब पांच महीने बाद दुबई से लौटे लवप्रीत सिंह ने आज सुल्तानपुर लोधी पहुंचकर निर्मल कुटिया में राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल का धन्यवाद किया। लवप्रीत ने बताया कि अरब देशों में मजदूर भेजने वाले एक नामी ट्रैवल एजेंट ने उसके साथ धोखाधड़ी की। उसे दो महीने के टूरिस्ट वीज़ा पर दुबई भेजकर एक कंपनी में काम पर लगा दिया गया। 

उसने बताया कि उससे वादा किया गया था कि उसे पैकिंग का आसान काम दिया जाएगा, लेकिन वहां पहुंचने पर उसे एक स्टील कंपनी में काम पर लगा दिया गया। लवप्रीत सिंह के अनुसार उसकी तनख्वाह 1300 दिरहम प्रति माह तय हुई थी, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 33 हजार रुपये बनती है। लेकिन चार महीने तक काम करवाने के बावजूद कंपनी ने उसे कोई वेतन नहीं दिया। बीमार होने पर उसका इलाज भी नहीं करवाया गया, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और परिवार चिंता में डूब गया। 

लवप्रीत की मां ने 6 अप्रैल को राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के कार्यालय पहुंचकर अपने इकलौते बेटे को भारत वापस लाने की गुहार लगाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लवप्रीत वेतन मांगता था तो कंपनी के कर्मचारी उसे डराते और धमकाते थे। उन्होंने कहा कि बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ उन्होंने अपने बेटे को विदेश भेजा था। 

संत सीचेवाल ने बताया कि लवप्रीत सिंह की वापसी के लिए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा गया था, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए 13 मई को उसे सुरक्षित भारत वापस भेज दिया गया। उन्होंने पंजाब के युवाओं से अपील की कि वे पूरी जांच-पड़ताल और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही विदेश जाएं। उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने पहल करते हुए लवप्रीत को सुरक्षित भारत पहुंचाने में मदद की। 

No comments