मजदूरों और कर्मचारियों के दमन की नीति पर उतरी सरकार ....
- झूठे मुकदमों से नहीं थमेगा पुरानी पेंशन बहाली का आंदोलन -- IREF
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
इंडियन रेलवे एम्पलाइज फेडरेशन (IREF) और RCFEU ने साझा बयान जारी करते हुए सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों और दमनकारी रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की है। 25 नवंबर 2025 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली के लिए एक ऐतिहासिक और विशाल विरोध प्रदर्शन किया गया था। इस प्रदर्शन में देशभर से उमड़े कर्मचारियों के जनसैलाब और उनके बुलंद हौसलों से घबराकर प्रशासन ने लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश की है।
इसी बौखलाहट के परिणामस्वरूप IREF के महासचिव सर्वजीत सिंह, नॉर्दर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन के जोनल पदाधिकारी रूपेश कुमार, नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के कार्यकारी अध्यक्ष सरदार सुखजीत सिंह और हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल के खिलाफ झूठी FIR दर्ज की गई, जिसकी पहली सुनवाई 23 अप्रैल को पटियाला हाउस कोर्ट में संपन्न हुई।
वर्तमान सरकार की नीतियां लगातार कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने और आम मजदूर व कर्मचारियों के भविष्य को अंधकार में धकेलने वाली रही हैं। रेलवे जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्थान में धड़ल्ले से किया जा रहा निजीकरण, आउटसोर्सिंग को बढ़ावा देना और नई भर्तियों पर अघोषित रोक लगाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार युवाओं के रोजगार और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं है। पुरानी पेंशन के हक को छीनकर सरकार ने बुढ़ापे का सहारा खत्म कर दिया है और अब चार नए श्रम कोड (Labour Codes) लागू कर मजदूरों को बंधुआ बनाने की तैयारी की जा रही है। इन नीतियों के खिलाफ जब भी कोई संगठन आवाज उठाता है, तो उसे मुकदमों और पुलिसिया कार्रवाई के जरिए डराने का प्रयास किया जाता है, लेकिन कर्मचारी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस दमन से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान कर्मचारियों की एकजुटता और विभिन्न संगठनों का आपसी सहयोग देखने को मिला। विशेष रूप से ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस ने इस संघर्ष में बड़ा दिल दिखाते हुए नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान की। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस की ओर से उपलब्ध कराए गए वकीलों ने बिना किसी आर्थिक सहयोग या खर्च के कर्मचारी नेताओं का पक्ष मजबूती से रखा, जिसके लिए IREF और समस्त कर्मचारी संगठन उनके तहे दिल से आभारी हैं।
यह एकजुटता इस बात का संदेश है कि जब सरकार दमन पर उतरती है, तो देश के तमाम संघर्षशील साथी एक मंच पर आकर सच्चाई और हक की लड़ाई को और अधिक मजबूती देते हैं। कर्मचारियों का मानना है कि ईमानदारी से लड़ने वाले लोग न तो झुकते हैं और न ही थकते हैं।
IREF और RCFEU ने यह संकल्प दोहराया है कि यह संघर्ष केवल एक अदालती तारीख तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था परिवर्तन और अधिकारों की प्राप्ति तक जारी रहेगा। सरकार चाहे कितने ही केस दर्ज कर ले, मजदूरों के हक, पुरानी पेंशन की बहाली, निजीकरण पर रोक और नए श्रम कोड को रद्द करवाने के लिए आंदोलन और भी तेज किया जाएगा। सच्चाई के रास्ते पर चलने वाले सिपाही कभी पीछे मुड़कर नहीं देखते और प्रशासन के हर वार का जवाब पूरी ताकत और एकजुटता के साथ दिया जाएगा। जब तक सरकार कर्मचारियों की जायज मांगें नहीं मान लेती, तब तक यह वैचारिक और जमीनी लड़ाई निरंतर जारी रहेगी।



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