राज्यसभा में निजी अस्पतालों और बीमा कंपनियों की लूट का मुद्दा गूंजा ....
- संत सीचेवाल ने निजी अस्पतालों और बीमा कंपनियों पर लगाम कसने की मांग की
- स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए देश को पंजाब के रास्ते पर चलने की जरूरत
- पीजीआई जैसे और अस्पतालों की जरूरत
- बीमा कंपनियों की शर्तें सरल और मातृभाषा में हों
खबरनामा इंडिया ब्यूरो। कपूरथला
राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने संसद में स्वास्थ्य सुविधाओं की आड़ में निजी अस्पतालों और बीमा कंपनियों द्वारा की जा रही लूट का मुद्दा उठाया। शून्यकाल के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे बुनियादी मुद्दे पर गरीब लोगों के साथ हो रहे शोषण और मरीज को ‘ग्राहक’ समझने की प्रवृत्ति के बारे में देश के लोगों को जागरूक किया। उन्होंने सदन में मांग की कि निजी अस्पतालों और बीमा कंपनियों की लूट पर लगाम कसी जाए। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों की शर्तें सरल और मातृभाषा में होनी चाहिए, ताकि उन्हें आसानी से पढ़ा और समझा जा सके।
संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने सदन में कहा कि पंजाब में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त किया जाता है। इसी पैटर्न पर पूरे देश में आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों की लूट से बचने के लिए लोग चंडीगढ़ के पीजीआई जैसे अस्पतालों का रुख करते हैं, लेकिन वहां पहले से ही 8 राज्यों के मरीज आने के कारण बहुत दबाव रहता है। उन्होंने मांग की कि पीजीआई जैसे और अस्पताल बनाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में डॉक्टर को दूसरा भगवान माना जाता है और स्वास्थ्य सेवाओं को एक पवित्र कार्य के रूप में देखा जाता है, लेकिन अब स्वास्थ्य सेवाएं एक बड़े मुनाफे वाले व्यवसाय में बदल गई हैं।
जहां निजी चिकित्सा सुविधाएं महंगी होने के कारण आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं, वहीं बीमा कंपनियां बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने और मुश्किल समय में मरीज का साथ देने के दावे तो करती हैं, लेकिन जब मरीज को जरूरत पड़ती है तो वे पॉलिसी की शर्तों को इतना जटिल बना देती हैं कि आम आदमी खुद को ठगा हुआ महसूस करता है।
बीमा कंपनियों और निजी अस्पतालों की मिलीभगत ने आम आदमी को एक ऐसे जाल में फंसा दिया है, जहां बीमारी से ज्यादा डर इलाज का हो गया है। इस पूरी व्यवस्था में बीमा कंपनियां सबसे चालाक खिलाड़ी बनकर उभरी हैं। संत सीचेवाल ने बातचीत के दौरान बताया कि महंगे इलाज के कारण कई बार परिवारों को अपनी जमा-पूंजी, गहने, यहां तक कि जमीन-जायदाद और घर तक बेचने पड़ जाते हैं।

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