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कपूरथला में 25 वर्ष पहले लापता व्यक्ति घर लौटा, समाने आये कई सवाल ...??

- पत्नी अब उसके अपने छोटे भाई की जीवन साथी बन चुकी  

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला     

कपूरथला के गांव शिव दयालवाला में हुई यह घटना भी कुछ ऐसी ही है, एक तरफ़ हंसा सिंह 25 साल बाद घर लौटा, तो दूसरी तरफ़, समय के साथ ज़िंदगी, रिश्ते और असलियत बदल गए। मानसिक रूप से परेशान हंसा सिंह जब 25 साल बाद अपने घर की गलियों में लौटा, तो यह उसके लिए सिर्फ़ वापसी नहीं थी, बल्कि एक ऐसा सच था जो उसका दिल चीर देगा। जिस घर को वह अपना समझता था, वहाँ उसकी पत्नी अब किसी और की जीवन साथी बन चुकी थी, वह भी उसके अपने छोटे भाई की। 

उसके लापता होने पर परिवार ने उसे सालों पहले मरा हुआ मान लिया था। रीति-रिवाज़ों और मजबूरियों के बीच पत्नी की शादी छोटे भाई से करवा दी गई। 22 साल की इस नई ज़िंदगी में उनके बच्चे भी हैं और एक भरा-पूरा परिवार बस गया है। जब हंसा सिंह वापस आया तो खुशी का पल था, लेकिन इस खुशी के पल के साथ साथ कई सवाल भी उठे हुए थे ? 

बता दे कि कपूरथला जिले का रहने वाला हंसा सिंह 25 साल पहले अचानक गायब हो गया था। परिवार ने उसे हर जगह ढूंढा लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। तीन साल इंतजार करने के बाद परिवार ने उम्मीद छोड़ दी और उसे मरा हुआ मान लिया। सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार, उसकी पत्नी की शादी उसके छोटे भाई से कर दी गई थी। वह दोनों 22 साल से शादी शुदा जीवन बिता रहे है। और दोनों के दो बच्चे हैं। सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक हंसा सिंह 25 साल बाद वापस आ गया।  

जानकारी अनुसार उत्तर प्रदेश के नरथूर के नए बाजार में एक आदमी फटे कपड़ों और लंबी दाढ़ी के साथ घूमता हुआ मिला। स्थानीय लोगों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। थाना प्रभारी रविंदर प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और उस आदमी से बात की। शुरू में वह कुछ साफ-साफ नहीं बता सका, लेकिन धीरे-धीरे उसने अपना नाम हंसा सिंह बताया। 

पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू की और आस-पास के लोगों की मदद से उसकी पहचान करने की कोशिश की। पंजाब पुलिस से भी संपर्क किया गया। 72 घंटे के अंदर परिवार वाले नरथूर पहुंच गए। पहले तो वह उसे पहचान नहीं पाए क्योंकि 25 साल में उसका हुलिया बदल गया था। लेकिन जब भाइयों और गांव के सरपंच ने उससे बचपन की यादों और घटनाओं के बारे में पूछा, तो वह इमोशनल हो गया और उसकी आंखों में आंसू आ गए। 

परिवार के लिए यह बहुत खुशी का पल था कि जो सदस्य हमेशा के लिए खो गया था, वह वापस मिल गया। लेकिन इससे एक बड़ी समस्या भी खड़ी हो गई। सबसे बड़ी चुनौती उसकी पत्नी विमला देवी के सामने है, अब वह किसे प्राथमिकता दें? एक तरफ उनके पहले पति हंसा सिंह हैं जो 25 साल बाद लौटे हैं, दूसरी तरफ सुख सिंह हैं जिन्होंने 22 साल तक उनका साथ दिया और उनके बच्चों के पिता हैं। 

इस घटना ने न सिर्फ इमोशनली बल्कि सामाजिक और कानूनी तौर पर भी एक बड़ी पहेली खड़ी कर दी है। परिवार बहुत मुश्किल हालात में है। इस पूरे मामले में नरथूर पुलिस की भूमिका की भी काफी तारीफ हो रही है। उन्होंने उस व्यक्ति की संवेदनशीलता से पहचान की जिसे लोग भिखारी समझ रहे थे, उसकी देखभाल की, उसे नए कपड़े दिए और धैर्य से उससे बात करके उसे उसके परिवार से मिला दिया। 

सबसे दर्दनाक पल तब था जब हंसा सिंह को उसकी पत्नी ने नहीं अपनाया। समय ने उसके लिए एक नया रास्ता बना दिया था, जिसमें हंसा सिंह के लिए कोई जगह नहीं बची थी। 

ऐसे में हंसा सिंह अब अपने भाइयों के साथ रह रहा है, वही भाई जिनके साथ उसने कभी अपना बचपन खेला-कूदा, आज वही उसका एकमात्र सहारा हैं। 

यह व्यक्ति उत्तर प्रदेश के नरथूर के बाजार में फटे कपड़ों, बिखरी दाढ़ी और उलझी यादों के साथ घूमता हुआ मिला था, किसी को अंदाजा नहीं था कि वह किसी परिवार का लापता सदस्य है। पुलिस की संवेदनशीलता भरी कार्रवाई और गांव वालों के सहयोग से वह अपने घर की चौखट तक पहुंच गया। 

इस मामले में गांव के सरपंच मलकीत सिंह, किसान नेता गुरसेवक सिंह शिव दयाल वाला और दूसरे खास लोगों ने भी बातचीत के दौरान बताया कि हंसा सिंह की दिमागी हालत ठीक नहीं है और उसे इलाज की बहुत ज़रूरत है। उन्होंने सरकार से भी अपील की है कि सरकार उसका इलाज करवाए और उसे कुछ पेंशन या पैसे की मदद दे ताकि वह अपनी बाकी ज़िंदगी किसी सहारे के साथ गुज़ार सके। 

क्योंकि यह परिवार ज़मीनहीन है, उनके नाम पर कोई ज़मीन या बड़ा सहारा नहीं है। ऐसे में हंसा सिंह की ज़िंदगी अब पूरी तरह से अपने भाइयों की मेहरबानी पर निर्भर है। यह घटना सिर्फ़ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा सवाल है, क्या समय के साथ रिश्ते खत्म हो जाते हैं? या वापस लौटने वालों के लिए कोई जगह होनी चाहिए? 

एक तरफ कानून, दूसरी तरफ सामाजिक रीति-रिवाज और सबसे बढ़कर इंसानी भावनाएं—ये तीनों ही इस कहानी में एक-दूसरे से टकरा रहे हैं…

आखिर में बस एक ही तस्वीर बचती है—एक ऐसा इंसान जो 25 साल बाद अपने घर लौटा है, लेकिन अभी भी अपनी ज़िंदगी की तलाश में है।  

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