RCFEU ने किया "काला दिवस" का आह्वान .....
- चार श्रम संहिताओं के खिलाफ वर्कशॉप गेट पर होगा जोरदार प्रदर्शन
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
कपूरथला RCF एम्पलाइज यूनियन के महासचिव सर्वजीत सिंह ने आज एक प्रेस बयान जारी करते हुए केंद्र सरकार की मजदूर व कर्मचारी विरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि इंडियन रेलवे एम्पलाइज फेडरेशन (IREF) और देश के तमाम केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर कल, 1 अप्रैल 2026 को, रेल कोच फैक्ट्री (RCF) के वर्कशॉप गेट पर सुबह 7:30 बजे कर्मचारी 'काला दिवस' मनाएंगे।
इस दौरान सभी कर्मचारी अपनी बांहों पर 'ब्लैक बैच' (काला बिल्ला) लगाकर सरकार की तानाशाही नीतियों के खिलाफ अपना रोष प्रकट करेंगे। महासचिव ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल का दिन केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह उस ऐतिहासिक संघर्ष की याद दिलाता है जिसके माध्यम से मजदूरों ने अपने अधिकार हासिल किए थे, लेकिन आज सरकार उन्हीं अधिकारों को छीनकर पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने पर आमादा है।
सर्वजीत सिंह ने कहा कि भारत सरकार द्वारा पुराने 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर जो चार नई श्रम संहिताएं (लेबर कोड) थोपी जा रही हैं, वे सीधे तौर पर गुलामी की ओर ले जाने वाला कदम हैं। पहले के श्रम कानून मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, काम के निश्चित घंटे, सुरक्षित कार्यस्थल और यूनियन बनाने की वैधानिक गारंटी देते थे, जिसे दशकों के बलिदान के बाद हासिल किया गया था।
इन नए कोड्स के लागू होने से न केवल काम के घंटे बढ़ जाएंगे, बल्कि छंटनी और 'हायर एंड फायर' की नीति को कानूनी मान्यता मिल जाएगी, जिससे कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा पूरी तरह खत्म हो जाएगी। सामाजिक सुरक्षा और ईपीएफ जैसे लाभों को भी सीमित किया जा रहा है, जो किसी भी कल्याणकारी राष्ट्र के लिए शर्मनाक है। यह केवल मजदूर विरोधी ही नहीं, बल्कि देश विरोधी नीति भी है क्योंकि यह देश के आर्थिक आधार यानी श्रमिक वर्ग को कमजोर कर रही है।
महासचिव ने आगे जोर देते हुए कहा कि आरसीएफ एम्पलाइज यूनियन रेलवे के निजीकरण और निगमीकरण के हर प्रयास का डटकर विरोध करेगी। सरकार श्रम कानूनों में बदलाव करके कॉरपोरेट घरानों के लिए रास्ता साफ कर रही है ताकि वे बिना किसी बाधा के मजदूरों का शोषण कर सकें। उन्होंने सभी रेल कर्मचारियों से अपील की कि वे कल सुबह भारी संख्या में वर्कशॉप गेट पर एकत्रित हों और काले बिल्ले लगाकर यह संदेश दें कि रेल कर्मचारी न तो डरा है और न ही झुका है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन घातक लेबर कोड्स को वापस नहीं लिया और कर्मचारियों की जायज मांगों को नजरअंदाज किया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।



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