कपूरथला में साइंस सिटी अब 100 फीसदी सौर ऊर्जा से जगमगाएगी ...
- पावर सेविंग मोड पर जाने की तैयारी में जुटा प्रबंधन
- साइंस सिटी में पहले से 100 केवी का सौलर पैनल स्थापित
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
साइंस की तिलिस्मी दुनिया के रूप में जानी जाती पुष्पा गुजराल साइंस सिटी अब 100 फीसदी सौर ऊर्जा से जगमाएगी। 72 एकड़ में फैली यह साइंस सिटी को पावर सेविंग मोड पर लाने की योजना पर प्रबंधन काम रहा है। हालांकि 2013 से यहां पर 100 किलोवाट का सोलर पैनल स्थापित है, जिससे बनी बिजली को साइंस सिटी के संचालन में इस्तेमाल किया जा रहा है। अब इसे पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर निर्भर बनाने की तैयारी चल रही है।
इस योजना के क्रियान्वयन होने से साइंस सिटी का सीधे तौर प 20 लाख रुपये सालाना की बचत होगी। वहीं, पावरकॉम पर निर्भरता भी नहीं रहेगी। साथ ही केंद्र सरकार की सौर ऊर्जा पर निभर्रता के बढ़ाने को बल मिलेगा।
जालंधर-कपूरथला रोड पर गांव वडाला के पास 2005 में स्थापित पुष्पा गुजराल साइंस सिटी में 12 गैलरी, तीन पार्क और छह शो के अलावा साइंस से संबंधित बहुत कुछ है। जिसके लिए सालाना 10 लाख यूनिट बिजली की जरूरत है, जिस पर करीब 40 स 42 लाख रुपये वार्षिक खर्च आता है।हालांकि इसमें 90 हजार यूनिट 100 केवी सोलर पैनल वाली शामिल रहती है। लेकिन कार्मशियल बिजली यूनिट खासी महंगी होने के चलते अब साइंस सिटी प्रबंधन इसके वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार रहा है।
जिसके लिए साइंस सिटी का 100 फीसदी संचालन सौर ऊर्जा पर करने की तैयारी की जा रही है। जिसके लिए मार्केट में पहले से मौजूद राष्ट्रीय व अंतर्राष्टीय कंपनियों से विचार-विमर्श किया जा रहा है।जिसके तहत साइंस सिटी को सौर ऊर्जा के रेस्क्यू मोड पर चलाने के लिए जरूरी मानकों के मद्देनजर बातचीत की जा रही है।साइंस सिटी के पावर सेविंग मोड पर जाने से जहां परपरांगत महंगी ऊर्जा से छुटकारा मिला, वहीं केद्र सरकार की ओर से सौर ऊर्जा को बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को और गति मिलेगी। साइंस सिटी के विज्ञानी-डी डा. मुनीष सोइन ने बताया कि सौर ऊर्जा से संबंधित राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों से बातचीत जारी है। इनमें से किसी एक कंपनी से अनुबंध होने के बाद टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। जिसके बाद साइंस सिटी का पूरा संचालन रेस्कयू मोड पर चलेगा। इससे करीब 20 लाख रुपये की सालाना बचत होगी, जिसे साइंस सिटी की बेहतरी के लिए काम में लाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस योजना के मुकम्मल होने से 100 फीसदी सौर ऊर्जा पर चलने वाली पहली साइंस सिटी बन जाएगी।
- साइंस सिटी में यह है देखने लायक ...
पुष्पा गुजराल साइंस सिटी में 12 स्पेस एवियशन, फन साइंस, इलेक्ट्रीसिटी, मैथमेटिक्स, साइंस ऑफ स्पोटर्स, हेल्थ, डिफेंस, एवेल्युएशन ऑफ मैन, एचआईवी-एड्स, साइबर स्पेस व ड्रग एब्यूज गैलरियां स्थापित हैं। इसके अलावा छह शो थ्री-डी, फ्लाई सिमुलेटर, अर्थक्वेक सिमुलेटर, जलवायु परिर्वतन, ईको-ईको शो और डोम थियेटर है, जोकि सबसे ज्यादा बिजली की खपत करते हैं। वहीं प्रशासनिक और स्टाफ के कार्यालय भी स्थापित हैं।वहीं, तीन डायनासोर, एनर्जी पार्क के अलावा जड़ी-बूटी पार्क भी बने हुए हैं।
-अब तक 60 लाख सैलानी देख चुके हैं साइंस सिटी ....
2005 से अब तक करीब 60 लाख सैलानी साइंस सिटी को देख चुके हैं। इनमें बच्चों की तादाद ज्यादा है। इस लिहाज से सालाना 3 से 3.5 लाख सैलानी हर साल साइंस सिटी का विजिट करते हैं।



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