हवा, पानी और धरती को बचाने का संदेश --- पवित्र वेईं की कार सेवा की 25वीं वर्षगांठ ...
- कार सेवा से साफ हुई पवित्र काली वेईं को पूरी दुनिया देख रही है -- डॉ. अफ़रोज़
- देश की नदियों का गंदे नालों में बदलना चिंता का विषय
- पवित्र वेईं की सेवा का सफर केवल सफाई तक सीमित नहीं, बल्कि एक जन-जागृति की लहर है -- डॉ. गोसल
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
हवा, पानी और धरती को बचाने के संदेश के साथ पवित्र काली वेईं की कार सेवा की 25वीं वर्षगांठ मनाने के लिए 4 दिवसीय आयोजन की शुरुआत हो गई है। राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल की अगुवाई में निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी में हो रहे इन समारोह के पहले दिन “पर्यावरण सम्मेलन 2025” का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने देश की नदियों के गंदे नालों में बदलने पर गहरी चिंता जताई।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सदस्य डॉ. अफ़रोज़ अहमद इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने संत बलबीर सिंह सीचेवाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि पिछले 25 वर्षों के दौरान उन्होंने संगतों को साथ लेकर 165 किलोमीटर लंबी नदी को साफ कर, जल के प्राकृतिक स्रोतों को बचाने की एक मिसाल कायम की है।
डॉ. अफ़रोज़ ने बताया कि जब भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल जल संरक्षण पर कोई फैसला देता है, तो उसमें “सीचेवाल मॉडल” का विशेष उल्लेख होता है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में जहां नदियों और झीलों पर अतिक्रमण कर उनकी पहचान तक मिटा दी गई थी, उन्हें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णयों में पुनः ‘नदी’ और ‘झील’ घोषित किया है। उन्होंने यह अनुभव भी साझा किया कि नदियों को सबसे ज्यादा नुकसान पेपर मिलों और शुगर मिलों से होता है।
उन्होंने कहा कि संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा कार सेवा के माध्यम से काली वेईं को जिस प्रकार से साफ किया गया है, उसे अब पूरी दुनिया देख रही है। यह सेवा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने वाली है। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस तरह से वेईं को पुनर्जीवित किया गया है, वह एक दिन दुनिया के नक्शे पर स्थान बनाएगी।
पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि काली वेईं की सफाई का यह अभियान केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक व्यापक पर्यावरणीय और आध्यात्मिक चेतना की लहर है।
उन्होंने कहा कि इसने पंजाब की धरती को वैश्विक पहचान दी है। आज हालात ऐसे हैं कि हमारे घरों के कमरों तक प्रदूषण पहुंच चुका है और हमें साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी है। उन्होंने सुझाव दिया कि घरों के अंदर विशेष किस्म के पौधे लगाने की ज़रूरत है।
समागम को संबोधित करते हुए संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य तेजी से बढ़ रहे वैश्विक तापमान को कम करने के प्रयासों को दिशा देना है। उन्होंने कहा कि यह एक चेतावनी है जिसे आज लोग समझ नहीं पा रहे। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को सही से निभाते, तो हमें ऐसे दिवस मनाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने गुरु बाणी के माध्यम से हमें सरल भाषा में सभी समस्याओं का समाधान बताया है, जिसे आज अपनाने की जरूरत है।
इस अवसर पर संत सुखजीत सिंह, एडीसी वरिंदरपाल सिंह बाजवा, बेगम सादिया, सुरजीत सिंह शंटी, निर्मल सिंह नंबरदार, परमजीत सिंह मानसा, एसडीएम अल्का कालिया, डीएसपी हरगुरदेव, सीनियर पत्रकार रोशन खैड़ा, डॉ. आसा सिंह घुम्मण और संत अवतार सिंह यादगारी स्कूल-कॉलेज स्टाफ समेत बड़ी संख्या में संगतें मौजूद थीं।
- नाव से कराए गए पवित्र वेईं के दर्शन, पानी की टीडीएस की कि गई जांच
निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी में आयोजित पर्यावरण सम्मेलन के दौरान पहुंचे डॉ. अफ़रोज़ अहमद (प्रिंसिपल बेंच, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह का संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने गर्मजोशी से स्वागत किया। संत सीचेवाल ने उन्हें नाव से पवित्र वेईं के दर्शन कराए और वेईं नदी के जल की टीडीएस जांच भी करवाई। इसके उपरांत गुरुद्वारा गुरप्रकाश साहिब के परिसर में पौधारोपण भी किया गया।


















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