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साइंस सिटी में जैविक विविधता दिवस --- जैविक विविधता में गिरावट मानवता के लिए खतरे की घंटी .....

 - फोटोग्राफी, स्लोगन लेखन और फेस पेंटिंग प्रतियोगिताएँ भी करवाई, स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में फगवाड़ा की गुरनाम कौर प्रथम  

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला    

कपूरथला में पुष्पा गूजरल साइंस सिटी के सहयोग से पंजाब जैविक विविधता बोर्ड के समर्थन से अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस बड़ी उत्साह के साथ मनाया गया। इस बार विश्व जैव विविधता मनाने का विषय ‘प्रकृति के साथ समानता और स्थायी विकास है। इस मौके पर पंजाब भर के 300 से अधिक स्कूलियों ने भाग लिया और रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए पर्यावरण की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस कार्यक्रम के दौरान स्कूलियों की फोटोग्राफी, स्लोगन लेखन और फेस पेंटिंग प्रतियोगिताएँ भी करवाई गईं।

साइंस सिटी के डाइरेक्टर डॉ.राजेश ग्रोवर ने अपने संबोधन में जैव विविधताओं दिवस के थीम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रकृति के हो रहे नुकसान को त्याग कर प्रकृति का सम्मान करने, संतुलन बनाए रखने और दीर्घकालिक स्थायी संबंध स्थापित करने की ज़रूरत पर बल दिया।  

उन्होंने बताया कि प्रकृति जहां हमें भोजन, साफ हवा, तरह-तरह की औषधियां और ऊर्जा प्रदान करती है, वहीं हमारे प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के साथ-साथ हमारे अनुकूल पर्यावरण प्रणालियों का भी समर्थन करती है। विश्व स्तर पर जैव विविधता में आई गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह खतरा न केवल जंगली जीवों पर ही मंडरा रहा है, बल्कि मनुष्यों के स्वास्थ्य, विकास और दुनिया की स्थिरता के लिए भी खतरे की घंटी है। उन्होंने अपील की कि जैव विविधता की बहाली हम सभी की जिम्मेदारी है और यही सभी का स्थायी भविष्य और धरती को स्वस्थ बनाने की कुंजी है।  

इस अवसर पर पंजाब विश्वविद्यालय पटियाला के जीवविज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. जगबीर सिंह ने दुनिया भर में जैव विविधता के नुकसान और खतरनाक स्थिति के बारे में छात्रों को गंभीरता से जागरूक किया। उन विद्यार्थियों को जानकारी देते हुए बताया कि ग्लोबल वार्मिंग और बड़े पैमाने पर जंगलों की हो रही कटाई से पौधों और जानवरों की प्रजातियों को सबसे ज्यादा खतरा है।  

उन्होंने आगे बताया कि भारत की 10 प्रतिशत पौधों की प्रजातियां खतरे में हैं। इसके अलावा पिछले दशक में 150 जड़ी-बूटियों का अवसान हो चुका है, जिनका उपयोग दवाओं में किया जाता है, और 10 प्रतिशत फुलदार पौधे, 20 प्रतिशत दूधारू जानवर और 5 प्रतिशत पक्षी खतरे की जद में हैं। उन्होंने कहा कि इस सदी के अंत तक जानवरों की 10 लाख प्रजातियां समाप्त हो जाएंगी।  

इसके अलावा, समुद्री जीवों का प्रवास स्थल भी समाप्त हो जाएगा। इस अवसर पर डा. जगबीर ने जैव विविधता की बहाली के लिए सभी से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान करते हुए आगे आने वाली पीढ़ियों के स्थायी भविष्य के लिए शिक्षा, दया और समर्पित कार्यवाही करने पर जोर दिया।इस अवसर पर आयोजित फोटोग्राफी प्रतियोगिता में सरकारी हाई स्कूल हमीरा के सुखप्रीत सिंह प्रथम स्थान पर रहे। वहीं फ़ेस पेंटिंग प्रतियोगिता में कमला नहिरू पब्लिक स्कूल फगवाड़ा की पीवीनी और अक्षर अवल विजेता रहीं। इसी तरह स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में साइफरन पब्लिक स्कूल फगवाड़ा की छात्रा गुरनाम कौर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

यह कार्यक्रम, "जैव विविधता की बहाली कोई विकल्प नहीं बल्कि धरती का भविष्य है" का मजबूत संदेश देते हुए सम्पन्न हुआ। 


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