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शहीद भगत सिंह के जन्मदिवस पर इंकलाब जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा RCF .....

- सरकार द्वारा कानूनों में संशोधन करने या नए कानून लाने का मतलब मजदूरों व आमजन की हक अधिकारों के लिए उठ रही आवाज को दबाना -- एडवोकेट अमनदीप 

- पूंजीपतियों के हाथ और मजबूत करने के लिए बनाए जाते हैं कानून  

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला      

शहीद भगत सिंह के जन्मदिवस पर RCF के वर्कर क्लब में देश की आजादी में बहुमूल्य योगदान देने वाले तमाम सुरवीरों को समर्पित इंकलाबी नाटक मेला शहीद भगत सिंह विचार मंच द्वारा करवाया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट अमनदीप कौर तथा सर्जन आर्ट ग्रुप रायकोट की टीम द्वारा नाटकों का मंचन किया गया, इंकलाबी नाटक मेले में "झंडा का गीत" मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।  

शहीद भगत सिंह विचार मंच के सचिव चंद्रभान ने कहा कि शहीद भगत सिंह विचार मंच द्वारा शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस को समर्पित करवाए गए इंकलाबी नाटक मेले में पहुंचे हुए कर्मचारी उनके परिवारों व बच्चों को शहीद भगत सिंह व उनके साथियों की विचारधाराओं पर चलते हुए एक अच्छे समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया। 

मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट तथा जमहुरी अधिकार सभा के राज्य कमेटी मेंबर अमनदीप कौर ने कहा कि देश के हुक्मरानों द्वारा थोपी जा रही मजदूर, आमजन व देश विरोधी नीतियों के चलते देश तबाही के कगार पर खड़ा है। इन परिस्थितियों का सामना करने के लिए हमारे पास एकमात्र रास्ता संयुक्त संघर्ष का है, हमें हमारे शहीदों से प्रेरणा लेनी चाहिए कि किस तरह उन्होंने अपनी जिंदगी देश के नाम समर्पित कर दी, हुकूमरानों के जबर-जुल्म के आगे ना झुकते हुए शहीद भगत सिंह जैसे अनेकों नौजवान क्रांतिकारियों ने क्रांति का झंडा बुलंद करते हुए देश के नागरिकों के उत्पीड़न हेतु बनाए गए कानून का जबरदस्त विरोध किया।  

उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार द्वारा कानूनों में संशोधन करने या नए कानून लाने का मतलब मजदूरों व आमजन की हक अधिकारों के लिए उठ रही आवाज को दबाना है, हमारे देश में सुरक्षा के नाम पर बनाए गए टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (TATA), मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (MISA), प्रिवेंशन ऑफ टेरेरिज्म एक्ट (POTA), आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट (AFSPA), यूएपीए इत्यादि अधिकतर कानूनों ने पुलिस एजेंसियों को अनगिनत खुले अधिकार दिए जिससे मेहनतकश लोगों की आवाज का गला घोटा गया तथा देशी-विदेशी पूंजीपतियों या यूं कहे कि मेहनतकश लोगों की मजदूरी हड़पने वाले लोगों के हाथ और मजबूत करने का कार्य किया है।  

इंकलाबी नाटक मेले में डॉक्टर सोमपाल हीरा की निर्देशना में सिर्जना आर्ट ग्रुप रायकोट द्वारा बहुत ही प्रभावशाली नाटक 'मिट्टी दे जाए' की पेशकारी की गई शहीद भगत सिंह विचार मंच की कल्चरल टीम द्वारा बहुत ही जबरदस्त तरीके से आजाद हिंद फौज को समर्पित "झंडे का गीत" गुरजिंदर सिंह की निर्देशन में पेश किया गया, इसके अतिरिक्त साकेत कुमार यादव की टीम द्वारा "महंगाई की महामारी" पर कोरियोग्राफी व दीपक नाहर की टीम द्वारा "भगत सिंह को फांसी" तथा "एक सी कां, एक सी चिड़ी" अनिल कुमार द्वारा कोरियोग्राफिया पेश की गई। इंकलाबी नाटक मेले में सम्मिलित करने आए समस्त श्रोताओं ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए शहीद भगत सिंह व उनके साथियों को याद किया। 

मंच के अध्यक्ष धर्मपाल ने धन्यवाद करते हुए कहा कि यह 18वां इंकलाबी नाटक मेला आप सब दर्शकों के सहयोग से एक अपनी अनोखी छाप छोड़ कर समाप्त हो रहा है, आप सब के सहयोग से आगे भी शहीद भगत सिंह विचार मंच द्वारा शहीद भगत सिंह व उनके साथियों के विचारों पर चलते हुए एक सेहतमंद समाज के निर्माण में अपनी भूमिका पेश करता रहेगा।

इस इंकलाबी नाटक मेले को सफल बनाने के लिए विशेष तौर पर RCFEU, IRTSA, एससी-एसटी, डॉ. भीमराव अंबेडकर सोसायटी, OBC एसोसिएशन, श्री गुरु रविदास सेवक सभा, यूरिया इत्यादि शामिल रहे व रेडिका की तमाम यूनियनस/ एसोसिएशन ने भरपूर साथ दिया।  

इस कार्यक्रम में जसपाल सिंह सैंखो, गुरविंदर सिंह, विनोद कुमार, अमरीक सिंह, सुखविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरशरण गोरा, साकेत यादव, समरेश कुमार, संदीप कुमार, संजय कुमार, सनोज कुमार, अश्वनी कुमार, हरप्रीत सिंह, अवतार सिंह, सुभाष कुमार, सीताराम, ओमप्रकाश, राजेंद्र कुमार, मदनलाल, पंकज, सुभाष, संजीव कुमार, अरविंद कुमार शाह सहित महिलाओं व बच्चों की विशेष भूमिका रही। 

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