तीन नए अपराधिक कानूनों पर RCF में विचार गोष्ठी ----
- बस्ती वादी कानूनों की धार को और तीखा करेंगे 3 आपराधिक कानून -- डॉ परमिंदर सिंह
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
बस्तीवादी विरासत से पीछा छुड़वाने के नाम पर 1 जुलाई 2024 को थोपे गए 3 नए आपराधिक कानून असल में बस्तीवादी कानूनों की धार को और तीखा करेंगे। यह कानून भी इंसाफ की बजाय सजा के सिद्धांत पर आधारित हैं और यह बुनियादी मानविय अधिकारों के खिलाफ हैं। यह विचार डॉ परमिंदर सिंह ट्रस्टी देशभगत यादगार हॉल तथा पूर्व प्रमुख अंग्रेजी विभाग, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर ने RCF में RCF बचाओ संघर्ष कमेटी की तरफ से करवाई विचार गोष्टी में कहे है।
3 नए अपराधिक कानूनों के बाद मानव अधिकारों पर संकट की संभावना विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कानूनों की जरूरत असल में सरकार तथा पूंजीपति वर्ग जिनका संसाधनों पर कब्जा होता है को अपनी राजसत्ता मजबूत करने तथा समाज को कंट्रोल करने के लिए ही होती है। उन्होंने कहा कि अगर समाज में बुनियादी अधिकारों और संसाधनों पर सब का एक समान अधिकार हो तो, ना तो हमें पुलिस की जरूरत है, ना कानूनों की, ना अदालतों की और ना ही जेलों की।
डॉ. परमिंदर सिंह ने बताया कि अंग्रेज हुकूमत द्वारा 1861 में बनाए गए इंडियन पीनल कोड/कानून का मकसद उन लोगों को सजा देना था जो हुकूमत के लिए खतरा बन सकते थे और उनका मकसद सजा देना था ना कि इंसाफ देना। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद वही कानून आज भी चल रहे हैं।
परमिंदर सिंह ने बताया कि संकट के खिलाफ संघर्ष करते लोगों को दबाने के लिए ऐसे ही कानून बनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) जैसे कानून के माध्यम से इंसाफ के संकल्प को ही उल्टा कर दिया गया है। पहले सरकार/प्रशासन की दोषी पर दोष साबित करने की जिम्मेदारी होती था। परंतु अब जिस व्यक्ति पर दोष लगाए गए हैं उसी पर खुद को बेकसूर साबित करने की जिम्मेदारी डाल दी गई है। उन्होंने कहा 3 आपराधिक कानून बस्तीवादी कानूनों की आमजन विरोधी धार को और तीखा करने का काम करेंगें। यह इंसाफ की बजाय सजा के सिद्धांत पर आधारित हैं। संघर्षशील लोगों की आवाज दबाने के लिए लाए गए हैं। यह मानवीय बुनियादी हक छीनने वाले तथा फासीवाद जैसे जुर्म करने की राह आसान बनाने वाले हैं।
डॉ सिंह ने तीन आपराधिक कानूनों पर कहा कि यह देश में पुलिस राज बनाने की तरफ़ अग्रेषित करने वाले हैं। यह संघर्ष का बुनियादी अधिकार छीनने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आम लोग पक्षी कानून एवं अधिकार किसी हुकूमत की तरफ से खैरात के रूप में नहीं मिले हैं बल्कि यह देश के मेहनतकश, गरीबों, आदिवासियों, दलितों तथा नौजवानों द्वारा लंबे संघर्षों के बाद प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के एकजुट व संयुक्त संघर्ष सरकार तथा कानूनों का मुंह मोड़ेंगे। अंत में उन्होंने कहा कि जितना हम एकजुट एवं मजबूत होते जाएंगे, सरकार उतना पीछे हटती जाएगी।
दलजीत सिंह सहोता जाने-माने वकील ने कहा कि नए कानून देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पुलिस राज बनाने की कोशिश है। जहां मनुष्य को विकास से केंद्र से निकलकर पूंजी तथा कारपोरेट को विकास के केंद्र में लाने की कोशिश की जा रही है। लोगों को कंट्रोल में रखने के लिए डरा कर रखने पर टेक रखी गई है। इन नए अपराधिक कानूनों के खिलाफ संयुक्त संघर्ष समय की जरूरत है।
राजेंद्र सिंह जोनल सचिव RCF मेंस यूनियन ने विचार गोष्ठी में पहुंचे मुख्य वक्ताओं तथा आरसीएफ कर्मचारियों का धन्यवाद करते हुए कहा के तीन नए अपराधिक कानून बुनियादी मानवी, ट्रेड यूनियन, शांति पूर्ण संघर्ष करने जैसे बुनियादी अधिकारों हमला है। आरसीएफ बचाओ संघर्ष कमेटी द्वारा इसके खिलाफ 6 अगस्त 2024 दिन मंगलवार को दोपहर 12 बजे रोष मार्च बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर चौक से निकाला जाएगा तथा माननीय राष्ट्रपति के नाम एक मेमोरेंडम GM आरसीएफ के माध्यम से भेजा जाएगा। जिसमें सभी संगठन शामिल होंगे। उन्होंने सभी कर्मचारियों को इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर भविष्य में तय किए जाने वाले प्रोग्रामों में बढ़ चढ़ कर शामिल होने की अपील की।
विचार गोष्ठी में सुमीत सिंह मीडिया प्रभारी, सुरजीत सिंह टिब्बा जोनल इंचार्ज तर्कशील सोसायटी पंजाब, राजेंद्र राणा, स्थानीय नेता, भारतीय किसान यूनियन (डकोदां) तथा राजवीर शर्मा, जगतार सिंह, मनजीत सिंह बाजवा, परमजीत सिंह खालसा, सोहन लाल बैठा, अरविंद कुमार व साथी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अध्यक्षता मंडल में राजेंद्र सिंह जोनल सचिव आरसीएफ मेंस यूनियन, सर्वजीत सिंह महासचिव, RCFEU, जीत सिंह ऑल इंडिया एससी/एसटी रेलवे एम्पलाईज एसोसिएशन, दर्शन लाल अध्यक्ष इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन, बक्शीश सिंह इंजीनियर्स एसोसिएशन, तरसेम सिंह यूरीया, अशोक कुमार, सचिव, ओबीसी एसोसिएशन RCF आदि शामिल थे।















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