जलवायु परिवर्तन के प्रभाव में देश के 310 जिलों के किसानों-मजदूरों की बांह पकड़ने का मुद्दा राज्यसभा में उठा ....
- संत सीचेवाल ने किसानों और मजदूरों के सभी प्रकार के कर्ज माफ किए जाने की अपील की
संसद के चल रहे मानसून सत्र के दौरान पर्यावरणविद् और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने किसानों के पक्ष में गुहार लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार बताए की उसने देश के 310 जिलों में जलवायु परिवर्तन के कारण प्रभावित हो रही किसानी और खेती को बचाने के लिए क्या किया। उन्होंने आज सदन में शून्य काल दौरान सदन का ध्यान महंगाई से जूझ रहे गरीबों की ओर दिलाया।
संत सीचेवाल ने कहा कि चाहे सूखा हो या बाढ़, किसान और मजदूर ही सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। ग्लोबल वार्मिंग से देश की कृषि पर पड़ रहे असर से केंद्र सरकार अनजान नजर आ रही है। उन्होंने पुरजोर मांग की कि पंजाब सहित देश के सभी किसानों और मजदूरों का समर्थन किया जाना चाहिए और किसानों और मजदूरों पर सभी प्रकार के कर्ज माफ किए जाने चाहिए, क्योंकि किसान बचेंगे तो ही आश्रित मजदूर भी बचेंगे।
बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कृषि पर लोकसभा की स्थायी समिति ने जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें कहा गया है कि देश के 310 जिले जलवायु परिवर्तन के प्रभाव में आ गये हैं। जिसमें पंजाब के 9 जिले, हिमाचल के 8 जिले और हरियाणा के 11 जिले शामिल हैं। अब ये खतरा और भी तेजी से बढ़ रहा है।
2019 और 2023 में पंजाब में बाढ़ के दौरान धान की फसल बर्बाद हो गई थी। बाढ़ के बारे में अधिकारियों की राय थी कि पंजाब में बाढ़ अगस्त/सितंबर में ही आती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन का असर तब साफ देखने को मिला जब साल 2023 में 10 और 11 जुलाई की रात को बाढ़ आई। पंजाब सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2019 में बाढ़ के कारण 1200 करोड़ का नुकसान हुआ था, जिसमें से 300 करोड़ का नुकसान बुनियादी ढांचे में हुआ था।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। भारत की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान लगभग 19.9 प्रतिशत है। यह क्षेत्र भारत के 42.6 प्रतिशत लोगों को रोजगार भी देता है।
बता दे कि 2022 में सूखे के साथ-साथ हीट वेव (गर्म हवाएं) ने भारत में गेहूं की फसल को प्रभावित किया और 2021 में गेहूं का उत्पादन 109.59 मिलियन टन से गिरकर 107.7 मिलियन टन हो गया। साल 2023 में भी इसी वजह से गेहूं का उत्पादन लक्ष्य से करीब 30 लाख टन कम रहा।















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