कपूरथला की डॉ. ईशा ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर उठाई आवाज, बोली --- कानून में सुधार की जरूरत ....
- डॉ. ईशा मनचंदा हिंदू मुस्लिम एकता के लिए एक सेतु का काम कर रही
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
तीन तलाक मुद्दे पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए अहम सुधार लाने की जरूरत है। यह विचार अभी हाल ही में तीन तलाक के उन्मूलन और प्रभाव: के महत्वपूर्ण विषय’ पर PHD करने वाली कपूरथला वासी डॉ. ईशा मनचंदा ने दिए है। हालांकि इशा कपूरथला के हिंदू परिवार से संबंधित है। जो कि कटटरपंथी के चलते लोगों की परवाह किये बिना हिंदू मुस्लिम एकता के लिए एक सेतु का काम कर रही है।
बता दें कि इस्लाम में शिशु हत्या को नापसंद किया गया है। वही हकमैहर में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा इस्लाम द्वारा की गई है। इसी विषय पर PHD करने वाली इशा मनचंदा ने अपनी थीसिस में इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन तलाक को लेकर पति को जेल भेजने की बजाय उस पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से बीकॉम (ऑनर्स) करने के बाद जालंधर से कानून में डिग्री प्राप्त की। और फैमिली लॉ में स्नातकोत्तर किया। पोस्ट ग्रेजुएट के बाद यूजीसी नेट 2017 की परीक्षा पास की। ईशा ने बताया कि उनकी गाइड डॉ. निर्मला देवी सहायक प्रोफेसर कानून विभाग गुरु नानक देव रीजनल कॉलेज, जो कि तीन तलाक के उन्मूलन और प्रभाव विषय पर सभी धर्म के बारे में निष्पक्ष रूप से पढ़ती थी। उनके कुशल मार्गदर्शन में विश्लेषण और शोध किया है।
ईशा मनचंदा ने बताया कि मुस्लिम महिलाओं के कल्याण के लिए भारत सरकार द्वारा पारित अधिनियम का आलोचनात्मक विश्लेषण किया है और अधिनियम की खामियों को दूर करने के लिए सुझाव दिए हैं। इस अधिनियम में निःसंदेह तीन तलाक की प्रथा में शामिल होने पर पति को दंडित किया गया है और महिलाओं के लिए गुजारा भत्ते का प्रावधान भी किया गया है। लेकिन इसमें यह उल्लेख नहीं किया गया है कि यदि पति जेल में है तो वह स्वयं और उनके बच्चे के लिए किससे भरण-पोषण का दावा करेगी ? जेल से आने के बाद, यदि पति कुरान के अनुसार तलाक की घोषणा करता है, तो राज्य मुसलमानों के बीच विवाह को कैसे संरक्षित करेगा?अधिनियम में सुधार हेतु शोधकर्ता द्वारा कुछ सुझाव दिये गये हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने दादा श्रीखरैती लाल मनचंदा जिन्होंने उन्हें बचपन में उर्दू सिखाई, की भी बहुत आभारी हैं। वह अपने माता-पिता की भी आभारी हैं। इसके अलावा डॉ. अब्दुल अजीज, मौलाना बुरहान अहमद जफर (काजी साहब), मकबूल अहमद, अहमदिया मुस्लिम समुदाय (कादियान) की ताहिरा मकबूल और प्रोफेसर इकबाल अली खान (पूर्व डीन और अध्यक्ष), कानून विभाग, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अलीगढ की भी बहुत आभारी हैं। और कपूरथला के सीनियर वकील मनु देव गौतम, पीयूष मनचंदा, जतिंदर मनचंदा, विकास भाम्भी, शुभम गौतम को भी हार्दिक धन्यवाद देती है। जिन्होंने बेहतर मागर्दर्शन किया।















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