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दशहरा पर्व पर श्री राम का पुतला जलाने का मामला ..... पंजाब सरकार के इशारे पर अमृतसर पुलिस मामूली धारायें लगा आरोपियों को बचाने मे लगी

- कैप्टन, सुखबीर बादल, जाखंड व भगवंत मान को पंजाब मे करोडो धर्म प्रेमियों व हिंदुओं को लगी ठेस मामले मे चुपी तोड़े -- युवा शक्ति संघ

खबरनामा इंडिया ब्यूरो। जालंधर / कपूरथला 

कुछ दिन पहले दशहरा पर्व पर अमृतसर के मानावाला मे ईसाई समाज के अशोक मसीह द्वारा अपने साथियों के साथ साज़िशन हिंदू सिख समाज मे विद्रोह पैदा कर धार्मिक दंगे करवाने की नियत से सिख समाज के पवित्र जयघोष ‘’बोले सो निहाल’’ लगा विडीओ बनाकर भगवान श्री राम चंद्र का पुतला जलाने के मामले को लेकर युवा शक्ति संघ के सिख, हिंदू व वाल्मिक समाज से संबधित नौजवान सरबजीत सिंह गिल, तलविंदर सिंह शेरू, जसप्रीत सिंह चड्ढा(मोंटू), एडवोकेट पीयूष मनचंदा, रोहित सहोता, प्रभजोत सिंह ने एस.जी.पी.सी प्रमुख लोंगोवाल व जत्थेदार हरप्रीत सिंह को पत्र लिख ईसाइयों द्वारा दशहरा पर बोले सो निहाल बोल भगवान राम का पुतला जलाने के मामला मे पक्ष रखने की अपील करते हुए कहा कुछ समाज एवं धर्म विरोधी लोग इस तरह की धर्म विरोधी घटनायें कर पंजाब सरकार के सरक्षण से करवा पंजाब की अमन शांति भंग करना चाहते है।

जिसका सीधा सबूत है की इतनी बड़ी धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली घटना होने के बावजूद तीन दिन तक पंजाब पुलिस ने कोई कारवाई नही की। जब 27 अक्तूबर को शाम एक न्यूज़ चैनल के माध्यम से इस घटना की विडीओ वायरल हुई तो पंजाब युवा भाजपा के उप-प्रधान अशोक सरीन हिक्की (एडवोकेट) ने रात आठ बजे सबूत सहित जालंधर के थाना तीन मे शिकायत दर्ज करवाई।  तब अमृतसर देहाती पुलिस ने लोपोके थाने मे देर रात ग्यारह बजे मामूली धाराओं के अधीन मुक़दमा दर्ज कर मात्र दिखावे के लिए कुछ आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया। और असली एवं साज़िशकर्ता मुजरिमों को आज तक नही पकड़ा है। क्योंकि पंजाब सरकार के इशारे पर अमृतसर पुलिस आरोपियों को जांच की आड़ मे बचाने का प्रयास कर रही है। इसलिए सभी राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक संस्थाओ को अपने निजी मतभेदों एवं मजबूरियों से ऊपर उठ कर इस घटना का विरोध कर आरोपियों पर सख़्त क़ानूनी कारवाई करवानी चाहिए। ताकि भविष्य मे दोबारा इस तरह की निंदनीय घटना किसी भी धर्म के साथ ना हो।

अपीलकर्ता युवाओं ने कहा कि इस दुखदायी घटना के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा समाज को सोशल मीडिया व तरीक़े से जागरुक करने वाले भाजपा नेता अशोक सरीन ने तो विरोध जताया परंतु बेहद दुःख की बात है की पंजाब मे चालीस प्रतिशत जनसंख्या वाले हिंदू समाज को इतिहास की सबसे बड़ी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली इस निंदनीय घटना पर पंजाब सरकार के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, अकाली दल प्रमुख सुखबीर बादल, पंजाब कांग्रेस प्रमुख सुनील जाखंड एवं आम आदमी पार्टी प्रमुख भगवंत मान की कोई प्रतिक्रिया नही आयी। जिस से साबित होता है की पंजाब मे हिंदुओं से सिर्फ वोट लेने के लिए नेता आते है उनको एवं उनके धर्म को सुरक्षा देना मे उनकी कोई दिलचस्पी नही है। इसलिय हिंदुओं एवं पंजाब की अमन शांति को बनाए रखने के इस संवेदनशील मामले मे इन नेताओं को पत्र लिख अपनी चुपी तोड़ने के लिए कहा गया है।


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