संत सीचेवाल की "अपना गांव संभालो" मुहिम को मिला समर्थन .....
- मालूपुर के लोगों ने 149 ग्राम चिट्टा पकड़ा, 7 बाइक बरामद, गांव में ठीकरी पहरा भी लगा
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल द्वारा नशों के खिलाफ शुरू की गई ‘अपना गांव संभालो’ और ‘चिट्टा मुक्त गांव’ मुहिम को अब जमीनी स्तर पर समर्थन मिलना शुरू हो गया है। मालूपुर गांव के लोगों द्वारा लगाए गए ठीकरी पहरे के दौरान नशा तस्करी के खिलाफ की गई कार्रवाई इस मुहिम की एक मिसाल बनकर सामने आई है।
गांववासियों ने ठीकरी पहरे के दौरान चार व्यक्तियों को काबू कर उनके पास से 149 ग्राम चिट्टा बरामद किया। इस दौरान कुछ संदिग्ध व्यक्ति अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए, लेकिन वे अपने मोटरसाइकिल वहीं छोड़ गए। गांववासियों ने कुल 7 मोटरसाइकिलें कब्जे में लेकर पुलिस के हवाले कर दीं। यहां तक कि पकड़े गए व्यक्तियों के वाहनों को गांववासियों ने ट्रॉली में लादकर मलसियां थाने पहुंचाया।
इस कार्रवाई पर संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने मालूपुर के लोगों की हौसला-अफजाई करते हुए उन्हें शाबाशी दी। उन्होंने कहा कि नशों के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार या पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब गांवों के लोग जागरूक होकर अपने बच्चों की रक्षा के लिए आगे आएंगे तो नशा तस्करों के लिए गांवों में पैर पसारना मुश्किल हो जाएगा।
संत सीचेवाल ने कहा कि नशे की लत इंसान से उसके रिश्तों और सामाजिक जिम्मेदारियों का एहसास तक छीन लेती है। नशे का आदी व्यक्ति अक्सर अपने परिवार के साथ-साथ समाज के लिए भी खतरा बन जाता है और राहगीरों को लूटने जैसी घटनाओं को जन्म मिलता है। उन्होंने कहा कि जब गांव अपनी जिम्मेदारी खुद संभालेंगे तो चोर और नशा तस्कर भागने के लिए मजबूर होंगे।
उन्होंने ठीकरी पहरा लगाने वाले गांवों के युवाओं से विशेष अपील की कि संदिग्ध व्यक्तियों के साथ किसी भी तरह की मारपीट या गैर-कानूनी कार्रवाई न की जाए। इसके बजाय उनकी वीडियो बनाकर तुरंत पुलिस को सूचित किया जाए, ताकि कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके।
संत सीचेवाल ने यह भी कहा कि नशे की लत का शिकार हुए युवाओं को केवल अपराधी के रूप में न देखा जाए, बल्कि उनके साथ सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें नशा मुक्ति केंद्रों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि एक युवा को नशे से बचाना केवल एक परिवार को नहीं, बल्कि पूरे समाज को बचाने के बराबर है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि ‘अपना गांव संभालो’ मुहिम आने वाले समय में और मजबूत होगी और इसके सार्थक परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि यदि पंजाब के गांव नशों से मुक्त हो जाएं तो हमारे युवा अपनी ऊर्जा कृषि और अन्य रचनात्मक कार्यों में लगा सकते हैं। “हमारे खेत सोना उगाते हैं; जरूरत सिर्फ अपने युवाओं को नशों से बचाकर उन्हें अपनी मिट्टी से जोड़ने की है।”



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