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राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण दौरान पेड़ों की सुरक्षा का मुद्दा राज्यसभा में गूंजा ....

- संत सीचेवाल के सवाल पर केंद्र का जवाब, बिना आवश्यकता नहीं काटे जाएंगे पेड़ 

- वैकल्पिक इंजीनियरिंग समाधान और ट्री ट्रांसप्लांटेशन को दी जाएगी प्राथमिकता 

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला    

राज्यसभा सदस्य संत सीचेवाल ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान बड़े, पुराने एवं विरासत स्वरूप पेड़ों की सुरक्षा का मुद्दा राज्यसभा में गंभीरता से उठाया। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के दौरान बिना आवश्यकता पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी। सरकार ने कहा कि जहां भी संभव होगा, वहां वैकल्पिक इंजीनियरिंग डिजाइन, राजमार्ग के अलाइनमेंट में बदलाव तथा ट्री ट्रांसप्लांटेशन जैसे उपाय अपनाकर पेड़ों को संरक्षित करने को प्राथमिकता दी जाएगी। 

संत सीचेवाल ने अपने लिखित प्रश्न के माध्यम से केंद्र सरकार से पूछा था कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान पुराने पेड़ों को बचाने के लिए कौन-कौन से वैकल्पिक इंजीनियरिंग समाधान अपनाए जाते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि पंजाब सहित देश के विभिन्न राज्यों में प्रतिपूरक वनीकरण (कम्पेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन) की क्या नीति है तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ग्रीन बेल्ट और जैव विविधता कॉरिडोर विकसित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी पूछा कि पंजाब सहित पूरे देश में पेड़ों की कटाई के बदले कितने पेड़ लगाए गए हैं। 

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि ग्रीन हाईवेज नीति-2015 के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ग्रीन बेल्ट विकसित की जा रही हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) स्थानीय जलवायु के अनुकूल देशी प्रजातियों के पौधे लगाने को बढ़ावा दे रहा है। इसके साथ ही बी कॉरिडोर और आरोग्य वन जैसी पहलों के माध्यम से जैव विविधता को मजबूत किया जा रहा है। 

सरकार ने यह भी बताया कि 19 अप्रैल 2022 को जारी ट्री ट्रांसप्लांटेशन नीति के अनुसार बिना आवश्यकता किसी भी पेड़ की कटाई नहीं की जाएगी। पेड़ काटने से पहले सभी संभावित विकल्पों पर विचार किया जाएगा तथा वैकल्पिक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई केवल वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के अनुसार ही की जाती है तथा प्रतिपूरक वनीकरण अनिवार्य है। 

संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि विरासत स्वरूप पेड़ हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं और उनकी सुरक्षा को प्रत्येक विकास परियोजना में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में दिए गए आश्वासनों को प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू करना समय की आवश्यकता है, ताकि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके। 

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