ब्रेकिंग न्यूज़

कपूरथला के पावर कॉम कर्मचारी की करंट लगने से मौत ....

- करतापुर में बिजली के खम्भे पर कर रहा था काम, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ 

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला   

कपूरथला के मोहल्ला अरफवाला वासी एक युवक की ड्यूटी के दौरान करतारपुर में बिजली के खंभे पर काम करते हुए करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई है। जिसकी पहचान गुरटेक सिंह के रूप में हुई है। वह बिजली बोर्ड करतारपुर में कार्यरत था और करीब डेढ़ माह पहले ही उसकी नौकरी पक्की हुई थी। इस हादसे से परिवार और इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।  

इस घटना की पुष्टि करते हुए पावर कॉम के SE एसपी सोंधी ने जहाँ दुःख प्रकट किया वहीँ यह भी बताया कि पीड़ित कर्मी के परिवार को एक्स ग्रेशिया राशि का 25 लाख का चेक सहायता सवरूप दे दिया गया है।  

परिवार के अनुसार, 9 अगस्त को मुख्यमंत्री के करतारपुर दौरे के चलते गुरटेक को उसके जेई ने निर्धारित रात की ड्यूटी के बजाय सुबह ड्यूटी पर बुलाया था। ड्यूटी के दौरान काम करते हुए करंट लग गया और उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। 

जनकारी अनुसार गुरटेक सिंह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। उसकी मां वरिंदर कौर और 22 वर्षीय बहन नवनीत कौर को जैसे ही गुरटेक सिंह की अचानक मौत की खबर मिली, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार के अनुसार, गुरटेक अपनी मां का इकलौता सहारा था और परिवार को उससे कई उम्मीदें थीं।

बताया जा रहा है कि गुरटेक सिंह की नौकरी पक्की होने के चलते परिवार ने 15 अगस्त को गुरुद्वारा खोजेवाल साहिब में शुक्राना पाठ का भी आयोजन करना था। लेकिन इससे पहले यह हादसा हो गया। सूत्रों की माने तो गुरटेक सिंह का जल्द ही करतारपुर से कपूरथला ट्रांसफर होना था, लेकिन ट्रांसफर होने से पहले ही गुरटेक इस दुनिया को अलविदा कह जाएगा। 

वहीँ बिजली बोर्ड के चीफ सुपरिटेंडिंग इंजीनियर (SE) एसपी सोंधी ने बताया कि इस घटना का उन्हें भी बहुत दुःख है। वह तथा उनकी टीम इस दुःख की घडी में परिवार के साथ है। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित कर्मी के परिवार को एक्स ग्रेशिया राशि का 25 लाख का चेक सहायता सवरूप दे दिया गया है।  और उसकी इंशोरेंस की राशि भी जल्द परिवार को दे दी जायगी।  

- पिता की मौत के छह साल बाद बेटे की भी असमय मौत ... 

गुरटेक सिंह के पिता स्वर्गीय चरणजीत सिंह उर्फ बुधू, स्वर्गीय हरनाम सिंह मिस्त्री के पुत्र थे। चरणजीत सिंह ने करीब 25 से 30 वर्षों तक शेर के एक इलेक्ट्रिकल स्टोर पर बतौर ड्राइवर के रूप में काम करते थे। काम के दौरान उनके साथ भी एक गंभीर सड़क हादसा हुआ था। और वर्ष 2019 में वह परिवार को हमेशा के लिए छोड़कर चले गए थे। 

अब गुरटेक की मौत से परिवार के साथ-साथ उसके दोस्तों, रिश्तेदारों और मोहल्ला निवासियों में भी गहरा शोक है। परिवार के लिए यह त्रासदी इसलिए भी अधिक पीड़ादायक है क्योंकि जिस बेटे के भविष्य को लेकर परिवार ने सपने संजोए थे, उसकी जिंदगी नौकरी पक्की होने के महज डेढ़ माह बाद ही अचानक खत्म हो गई। 

No comments