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संत सीचेवाल संसद सत्र छोड़ किसानों के खेतों को सवारने में जुटे .....

- बाढ़ कारण 4 से 5 फ़ीट तक जमा हो गई थी गाद  

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला    

सर्दी के संसदसत्र छोड़कर राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल बाढ़ प्रभावित मंड क्षेत्र के किसानों के खेतों को सवारने में जुट गए हैं। संत सीचेवाल ने बताया कि दो दिन संसद सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। एक अनुमान के अनुसार, संसद सत्र का रोज़ाना खर्च 10 करोड़ रुपये से ज्यादा आता है। दो दिनों में जनता के टैक्सों से 20 करोड़ रुपये की बर्बादी हुई है, लेकिन किसी भी दल को इसका कोई दुःख नहीं हो रहा। संत सीचेवाल ने इससे पहले राज्यसभा के अध्यक्ष को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने संसद सत्र की गतिरोध को लेकर लोगों के पैसों की बर्बादी रोकने की अपील की थी। 

मंड क्षेत्र के सांगरा गाँव में ग्रंथी काबल सिंह के डेढ़ एकड़ खेत में गेहूं की बुवाई शुरू करवाई गई। इस परिवार के पास 5 एकड़ ज़मीन है, जिसमें बाढ़ के कारण रेत और गाद चढ़ गई थी। संत सीचेवाल की टीम के सदस्य सतिंदर सिंह बग्गा ने ज़मीन को समतल करने के लिए बड़े ट्रैक्टर और मुफ्त डीजल का इंतजाम कर खेतों को दोबारा आबाद किया। 

बाऊपुर कदीम के किसान मेजर सिंह की ज़मीन पर तो रेत की परत काफी मोटी चढ़ चुकी है। इस किसान की ज़मीन को समतल करने के लिए एक एक्सवेटर और ट्रैक्टर लगाए गए हैं। पक्की मिट्टी को चार-चार फीट तक खोदकर उसे फिर से रेत से भरकर, उसके ऊपर पक्की मिट्टी डाली जा रही है। 

संत सीचेवाल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित किसानों के खेतों की सवारी का काम आज भी युद्धस्तर पर जारी है। जिन किसानों की ज़मीन समतल हो चुकी है, उनकी फसल की बुवाई हो चुकी है। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि संत सीचेवाल जी के प्रयासों से 250 एकड़ ज़मीन समतल करके गेहूं की बुवाई पूरी हो चुकी है। किसानों की ज़मीन समतल करने के लिए कई ट्रैक्टर दिन-रात काम कर रहे हैं।  

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