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RCFEU और IREF द्वारा राष्ट्रव्यापी हड़ताल को मिला ऐतिहासिक समर्थन .....

- डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर विशाल विरोध प्रदर्शन संपन्न     

- RCF प्रशासन और केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों की निंदा  

खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला    

रेलवे कोच फैक्ट्री (आरसीएफ) एम्पलाइज यूनियन और IREF के आह्वान पर आज केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी हड़ताल को RCF में अभूतपूर्व समर्थन मिला है। इस कड़ी में आज सुबह डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक (वर्कशॉप चौक) पर एक विशाल और सशक्त विरोध प्रदर्शन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।  

हजारों की संख्या में RCF के कर्मचारियों ने इस प्रदर्शन में उत्साहपूर्वक भाग लिया और भारत सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन को ऑल इंडिया ओबीसी रेलवे एम्पलाइज एसोसिएशन से अरविंद कुमार और इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) से जगतार सिंह एवं एससी & एसटी एम्पलाइज एसोसिएशन का भी पुरज़ोर समर्थन प्राप्त हुआ, जिन्होंने भारत सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत हड़ताल का समर्थन किया। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य पुरानी पेंशन योजना की तत्काल बहाली, सरकार द्वारा थोपे गए चार श्रम संहिताओं को रद्द करना, ठेका प्रथा के बढ़ते चलन पर रोक लगाना और भारतीय रेलवे सहित अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का पुरज़ोर विरोध करना था।  

RCFEU एवं IREF के राष्ट्रीय महासचिव सर्वजीत सिंह ने इस अवसर पर कर्मचारियों की भारी उपस्थिति को उनकी एकजुटता और अपने अधिकारों के प्रति दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि यूनियन सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीतियों और श्रम कानूनों को लागू करने की किसी भी साज़िश को सफल नहीं होने देगी। सिंह ने कहा कि ठेका प्रथा और निजीकरण भारतीय रेलवे को दीमक की तरह खोखला कर रहा है और इसके खिलाफ आंदोलन और भी तेज़ किया जाएगा। उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली को कर्मचारियों का एक "अहम मुद्दा" बताते हुए कहा कि इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा और इसे हर हाल में लागू करवा कर रहेंगे।  

यूनियन के संगठन सचिव, भरत राज ने रेल कोच फैक्ट्री के मौजूदा हालातों पर आरसीएफ प्रशासन की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस भयंकर गर्मी में कर्मचारियों को पीने के लिए साफ पानी, पर्याप्त पंखे और आवश्यक सेफ्टी इक्विपमेंट उपलब्ध न करवाए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया। भरत राज ने भारत सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए उसकी मजदूर विरोधी नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली, लेबर कोड्स का विरोध, न्यूनतम बेसिक वेतन ₹26,000 करने, आठवें पे कमीशन के गठन और सातवें पे कमीशन के अनुसार पीएलबी (प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस) बोनस का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने आज के सफल प्रदर्शन को कर्मचारियों की ताकत का प्रदर्शन बताया।  

यह विशाल प्रदर्शन आरसीएफ कर्मचारियों के बीच व्याप्त असंतोष और अपने भविष्य को सुरक्षित करने की उनकी आकांक्षा को दर्शाता है। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप लेगा।

विरोध प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए कोषाध्यक्ष हरविंदर पाल, कार्यकारी अध्यक्ष मनजीत सिंह बाजवा, महा सचिव अमरीक सिंह गिल, जसपाल सिंह शेखों, अरविंद कुमार शाह, त्रिलोचन सिंह, तलविंदर सिंह, गुरजिंदर सिंह, चंद्रभान, शिवराज मीणा, हरिओम मीणा, लकी भाटिया, संदीप कुमार, अवतार सिंह, बच्चीतर सिंह, नरेंद्र कुमार, प्रदीप सिंह, हरप्रीत सिंह, अमरनाथ, नवीन कुमार, सनोज कुमार यादव, समरेश कुमार, पंकज कुमार, संजय कुमार, रमनदीप सिंह, संजीव कुमार, विनोद कुमार, अश्विनी कुमार, लकी भाटिया, अनिल कुमार, जगजीत सिंह, भान सिंह, गुरविंदर सिंह, साकेत कुमार यादव इत्यादि सहित सैकड़ो कर्मचारी शामिल हुए।  

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