RCF में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को समर्पित विचार-चर्चा ...
\- कन्नू प्रिया की कविता “माए नी इक लोरी दे दे” से हुआ आगाज़
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को समर्पित विचार-चर्चा कार्यक्रम रेल कोच फैक्टरी कपूरथला के स्थानीय वर्कर क्लब में RCFEU और शहीद भगत सिंह विचार मंच (महिला विंग) की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कन्नू प्रिया की कविता “माए नी इक लोरी दे दे” गाकर की गई। इसके अलावा बच्चियों द्वारा महिलाओं की सामाजिक स्थिति को दर्शाती कविताएँ भी प्रस्तुत की गईं।
स्वागत भाषण में रिंपल प्रीत ने हमारे देश भारत में महिलाओं के संघर्षपूर्ण जीवन, उनकी उपलब्धियों और उनके साथ होने वाले अन्याय के बारे में संक्षिप्त जानकारी आँकड़ों सहित दी।
प्रोफेसर भूपिंदर कौर ने बताया कि आज महिलाएँ शिक्षा के माध्यम से ऐसे मुकाम तक पहुँच चुकी हैं कि चाहे राजनीति का क्षेत्र हो या विज्ञान का क्षेत्र कल्पना चावला जैसी महिलाओं ने बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की हैं, और सामाजिक क्षेत्र में भी असंख्य महिलाएँ अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
मुख्य वक्ता के रूप में अमनदीप कौर, एडवोकेट (पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट, चंडीगढ़) तथा जम्हूरी अधिकार सभा की राज्य समिति सदस्य ने महिला दिवस मनाने के पीछे के कारण और इसकी शुरुआत कब हुई, इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज से लगभग 125 वर्ष पहले, जब महिलाएँ पुरुषों के बराबर काम करती थीं, तब उन्होंने महसूस किया कि पुरुषों के बराबर काम करने के बावजूद उन्हें समान सुविधाएँ और वेतन क्यों नहीं मिलते। उस समय उन्हें मतदान का अधिकार भी नहीं था और राजनीति में भी उनकी भागीदारी नहीं थी, जबकि आबादी का आधा हिस्सा महिलाओं का ही है।
1900 के दशक में शुरू हुए लंबे संघर्षों के बाद महिलाओं ने अपने मान-सम्मान के लिए 8 मार्च को महिला दिवस मनाने का अधिकार प्राप्त किया। आज भले ही महिलाएँ शिक्षा प्राप्त करके दुनिया के हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी के माध्यम से बराबर का योगदान दे रही हैं, लेकिन पिछड़ी सोच और समाज में अपनी प्रभुत्व (चौधर) बनाए रखने के कारण पुरुषों द्वारा उन्हें उनका उचित सम्मान अभी भी नहीं दिया जा रहा है।
आज भी बच्चियों को जन्म लेने से लेकर पूरी जिंदगी तक आज़ादी से जीने का अधिकार नहीं दिया जाता। उनके ऊपर हर कदम पर अनावश्यक पाबंदियाँ लगा दी जाती हैं। इसके अलावा कॉरपोरेट जगत की चमक-दमक भरी दुनिया में भी महिलाओं को अक्सर एक वस्तु के रूप में ही प्रस्तुत किया जाता है, उससे आगे कुछ नहीं समझा जाता।
देशों के बँटवारे के समय, चाहे वह भारत-पाकिस्तान का विभाजन हो, उसमें भी महिलाओं को सबसे अधिक अत्याचारों का सामना करना पड़ा। आज भी साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा अपनी कठपुतली सरकारों के माध्यम से—भले ही वे खुद को सभ्य और विकसित बताते हों, दूसरे देशों के लोगों के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने के लिए अन्यायपूर्ण युद्ध थोपे जा रहे हैं। इन युद्धों में भी महिलाओं को विशेष रूप से निशाना बनाकर अत्याचार किए जाते हैं।
यदि हमें एक अच्छा और रहने योग्य समाज बनाना है, तो इसकी शुरुआत हमें अपने घरों से ही करनी होगी। यदि घर में पिता द्वारा महिलाओं के साथ मारपीट या अपमान किया जाता है, तो बच्चे भी ऐसी ही आदतें सीखकर आगे बढ़ाते हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
स्टेज सचिव की जिम्मेदारी मैडम परमिंदर कौर (मोगा) ने बहुत अच्छे ढंग से निभाई। उन्होंने विचार-चर्चा में शामिल महिलाओं को भी आमंत्रित किया कि हम सभी को मिलकर अपनी शक्ति को पहचानना चाहिए और संगठित होकर आगे बढ़ना चाहिए और अपने वैध अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए।
अध्यक्ष मंडल में शामिल बहनें गुरमीत कौर, दर्शनां रानी, मोनिका, मैडम कांता, भूपिंदर कौर और परमिंदर कौर। कार्यक्रम को सफल बनाने में आशा रानी, वीना रानी, अमन, कुलजीत कौर, इंदरजीत कौर ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया। इसके अलावा उपस्थित श्रोताओं में चरणजीत कौर, सिंदर कौर, परमजीत कौर, सुनीता रानी, कृष्णा देवी, जसबीर कौर, शेली शर्मा, निर्मला रानी, मंजू आदि भी मौजूद थीं।
इस अवसर पर RCFEU के अध्यक्ष अमरीक सिंह, सचिव सरबजीत सिंह, मनजीत सिंह बाजवा, भरत राज, जसपाल सिंह सेखो, प्रदीप कुमार, बरजिंदर पाल, शिव लाल मीना, राजिंदर कुमार, सतपाल सिंह, परविंदर कुमार भी उपस्थित रहे।
इसी प्रकार शहीद भगत सिंह विचार मंच के अध्यक्ष धर्मपाल, सचिव चंदर भान, विनोद कुमार, राम दास, सुरिंदर कुमार, राज कुमार परजापति, जसवंत सिंह गिल, तरसेम सिंह गोगी, गुरजिंदर सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुए। वर्कर क्लब कमेटी के सदस्य: अवतार सिंह जी, अश्वनी कुमार, हरप्रीत सिंह के अतिरिक्त आईआरटीसी से श्री दर्शन लाल, विकास कुमार, महिंदर बिश्नोई, पूरण जी तथा ओबीसी से अरविंद कुमार अपनी टीम के साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहे।



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