RCF कर्मचारियों के हक एवं अधिकार के लिए संघर्ष करना ही हमारी पहली प्राथमिकता -- खालसा
- मान्यता के चुनाव में RCFEU को IRTSA का पूर्ण समर्थन -- दर्शन लाल
खबरनामा इंडिया बबलू। कपूरथला
कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री में 4 दिसंबर को होने वाले यूनियन मान्यता चुनाव के लिए कर्मचारियों को जागृत करने हेतु RCFEU द्वारा स्थानीय वर्कर क्लब में जनरल काउंसिल की मीटिंग की गई। सभी कर्मचारियों से चुनाव निशान घर पर वोट देने की अपील की गई।
इस मौके पर कर्मचारियों को संबोधित करते हुए IRTSA प्रधान दर्शन लाल ने कहा कि RCF में कारखाने को बचाने के लिए बहुत बड़े-बड़े संघर्ष किए गए हैं। जिसकी हमेशा से नेतृत्व RCFEU ने किया है, अगर संघर्षशील लोगों में किसी का नाम किसी का लिया जाता है तो वह RCFEU है। उन्होंने कहा कि RCFEU की बदौलत ही पेंशन का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर का बन पाया है, कारखाने के अंदर आउटसोर्सिंग इत्यादि के ऊपर भी यूनियन लगातार संघर्ष करती आ रही है इसलिए IRTSA पूर्ण समर्थन देने की घोषणा करता है । एवं सभी कर्मचारी से अपील किया कि भारी मतों से RCFEU को जीत दिलाये।
RCFEU के सरपरस्त परमजीत सिंह खालसा ने कहा कि संगठन ने कर्मचारियों के हक़-अधिकारों के लिए आगे बढ़कर हमेशा संघर्ष किए हैं, और RCFEU द्वारा किए गए ऐतिहासिक संघर्षों की बदौलत ही RCF को भारतीय रेलवे का स्वर्ग कहा जाता है।
2006 में जब रेल कोच फै़क्टरी को PSU बनाने का फरमान जारी किया गया था तो उसके खिलाफ़ एक लंबा संघर्ष किया गया एवं संघर्ष को जीता गया। इसी प्रकार 2006-2012 के बीच में सैकड़ों एक्ट अप्रेंटिस किये लड़कों को संघर्ष कर नौकरी दिलवायी गई।
2013 मैं विवेक देबरॉय कमिटी की सिफ़ारिशों के ख़िलाफ़ एक लंबी लड़ाई लड़ी गई। कर्मचारियों के किए अतिरिक्त कार्य के बदले उन्हें इंसेंटिव भुगतान, RCF प्रशासन तथा रेलवे बोर्ड पर दवाब बनाकर समय-समय पर लगातार नई भर्ती करवाना, RCF में बढ़ रही आउटसोर्सिंग, ठेकेदारी प्रथा पर लगाम लगाने, कोच की गुणवत्ता सुधारने, घटिया सामान पर लगाम लगाने के लिए लगातार संघर्ष करने, कॉलोनी परिसर का बढ़िया रखरखाव करने, कर्मचारी व उनके परिवारों को मिलने वाली सभी तरह की सुविधा सुनिश्चित करने इत्यादि को लेकर लगातार संघर्षरत है।
उन्होंने आगे कहां की पूरी रेलवे में निजीकरण पॉलिसी को लागू करने, पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करवाने की जगह कर्मचारियों पर जबरदस्ती UPS थोपने, रेलवे कायाकल्प कमेटी, रेलवे रिस्ट्रक्चरिंग कमेटी इत्यादि कमेटियाँ जिन्होंने रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर तथा रेलवे कर्मचारियों का बहुत बड़ा नुकसान किया है, का समर्थन करने वाले दोनों मान्यता प्राप्त संगठनों का सभी कर्मचारी खुलकर विरोध कर रहे हैं, RCF सहित पूर्ण रेलवे में दोनों मान्यता प्राप्त फेडरेशन का कर्मचारियों द्वारा बहिष्कार किया जा रहा है।
RCFEU के सयुंक्त सचिव मनजीत सिंह बाजवा ने स्टेज सेक्रेटरी की भूमिका बखूबी निभाई एवं कहा की रेलवे में दो यूनियन को मान्यता देने का चलन होने के चलते निजीकरण, आउटसोर्सिंग इत्यादि कर्मचारी विरोधी नीतियां दिल्ली में बैठे बड़े-बड़े फेडरेशनों के लीडर बनाते हैं। जिसका कर्मचारियों को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, इसी के चलते रेडिका में समस्त कर्मचारियों का लक्ष्य है कि RCF में एकमात्र यूनियन RCFEU को भारी बहुमत से मान्यता देकर "एक अदारा-एक यूनियन" का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।
उन्होंने संयुक्त रूप में कहा कि संगठन कर्मचारियों को साथ लेकर भारत सरकार की कर्मचारी नीतियों के विरोध में जबरदस्त संघर्ष खड़ा करेंगे, उन्होंने रेडीका में स्कूल बसों की उदाहरण देते हुए कहा कि जो काम पूरी रेलवे में नामुमकिन कहा जा रहा था वह RCF ने मुमकिन करके दिखाया है। जब पूरी भारतीय रेलवे में नई भर्ती पर रोक लगा दी गई थी उस समय RCFEU की बदौलत पुरी भारतीय रेलवे में लगभग 48 हजार नोंजवानों को नौकरी देने का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि रेडिका के समस्त कर्मचारियों को साथ लेकर संगठन हमेशा UPS, NPS, निगमीकरण, निजीकरण, आउटसोर्सिंग, ठेकेदारी, ऑफ लोडिंग इत्यादि के खिलाफ तथा नई भर्ती, कर्मचारियों के हक अधिकारियों तथा कारखाने की खुशहाली के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
इस जनरल काउंसिल मीटिंग में मुख्य रूप में शरणजीत सिंह, त्रिलोचन सिंह, अरविंद कुमार शाह, अनिल कुमार, जगदीप सिंह, प्रदीप सिंह, साकेत यादव, हरिकेश,अश्वनी कुमार, सनी, रोनित, मनोहर लाल, पंकज कुमार, राजेंद्र कुमार, सुभाष, सुरेंद्र कुमार, संजय कुमार, कौशल, बलराम, मैनपाल, मक्खन सिंह, जगजीत सिंह, एसएन भाटिया, अमरीक सिंह इत्यादि सैकड़ो कर्मचारी सहित यूनियन की पूरी कार्यकारिणी ने भरपूर सहयोग दिया।
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