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कपूरथला स्थायी लोक अदालत के आदेश ---- ओरिएंटल इंश्योरेंस व रक्षा TPA को 1,68, 383 रुपये भुगतान का आदेश ...

- आवेदक को 25,000 रुपये की समग्र लागत का भुगतान करने का भी आदेश   

खबरनामा इंडिया ब्यूरो। कपूरथला    

कपूरथला स्थायी लोक अदलात के चेयरमैन मुकेश बंसल और मैंबर डॉ. उपासना वर्मा ने एक मह्त्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी व रक्षा TPA (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) को वरिष्ठ नागरिक अश्वनी सूद को सालाना 9 फीसदी बयास के साथ 1,68,383 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। 

आवेदक अश्वनी सूद के अनुसार उनका PNB बैंक में एक बचत बैंक खाता था और बैंक का ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के साथ अनुबंध था। जिसके तहत बैंक के अधिकारियों की सलाह के अनुसार याचिकाकर्ता ने स्वास्थ्य पॉलिसी "पीएनबी- ओरिएंटल रॉयल मेडिक्लेम पॉलिसी" साल 11 मार्च 2016 से 10 मार्च 2017 की मध्यरात्रि तक अपने और अपने आश्रितों के लिए ली थी। 

जिसके लिए 6960 रुपये का प्रीमियम भुगतान किया। बाद में फिर से प्रीमियम का भुगतान किया गया और पॉलिसी 10 मार्च 2018 तक वैद्य थी। इसी बीच अश्वनी सूद कि तबीयत खराब हो गई, इसलिए उन्हें जालंधर के निजी अस्पताल के कार्डियक सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां वे 04 अक्टूबर 2017 से 07 अक्टूबर 2017 तक भर्ती रहे और डॉक्टर के अनुसार वे हृदय धमनियों में रुकावट से पीड़ित थे, जिस कारण उनके स्टेंट लगाया गया था। इसके बाद अश्वनी सूद के रिश्तेदार ने इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क करके सूचित किया, लेकिन इंश्योरेंस कंपनी ने उस समय मदद से इंकार कर दिया।  

अश्वनी सूद को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद इंश्योरेंस कंपनी के सर्वेयर ने अस्पताल का दौरा किया और अश्वनी सूद के इलाज के दस्तावेज हासिल किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल दस्तावेज सर्वेयर ने ले लिए और फिर से बीमा कंपनी ने दोबारा दस्तावेज मांगे और कई बार कंपनी को फोटोकॉपी उपलब्ध भी कराई गई। जिस पर कंपनी ने टर्म्स एंड कंडीशंस का हवाला देते क्लेम सेटल करने के आवेदन को अस्वीकार कर दिया। जिसके बाद अश्वनी सूद ने अपने वकील अनुज आनंद के जरिये स्थायी लोक अदलात कपूरथला में केस दायर किया। अदालत ने इंश्योरेंस कंपनी को नोटिस जारी किया। जिस पर कंपनी अपने वकील के माध्यम से पेश हुए और 

अश्वनी सूद ने अपने केस में अपना हल्फिया बयान और आठ दस्तावेज़ पेश किए। जबकि पंजाब नेशनल बैंक को दिनांक 09 जुलाई 2018 के आदेश द्वारा रेस्पोंडेंट की सूची से हटा दिया गया था। इंश्योरेंस कंपनी और रक्षा टीपीए ने भी अपना हल्फिया बयान और करीब चार दस्तावेज़ पेश किए और अपने जवाब में पॉलिसी के नियम और शर्तों का हवाला देकर केस खारिज करने की दरख्वास्त दी।  

दोनों पक्षाें की बहस सुनने के बाद मुकेश बंसल चेयरमैन परमानेंट अदलात और मेंबर डॉ. उपासना वर्मा ने दोनों ओर से पेश किए दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद फैसला सुनाते हुए अदालत ने अश्वनी सूद के केस को स्वीकार किया और इंश्योरेंस कंपनी व रक्षा टीपीए को निर्देश दिया कि दोनों दरख्वास्तकर्ता अश्वनी सूद के इलाज में हुए खर्चे 1,68,383/- रुपये O8 अक्टूबर 2017 से सालाना 9 फीसदी की दर के साथ दो माह में भुगतान करें। इसके अलावा मुकदमेबाजी, ऑपरेशन के बाद चिकित्सा शुल्क और मानसिक पीड़ा के लिए आवेदक को 25,000 रुपये की समग्र लागत का भुगतान करने का भी आदेश दिया। ऐसा न करने पर इस राशि पर आदेश की तारीख से प्रति वर्ष 9 फीसदी दर से ब्याज लगेगा और उस स्थिति में शिकायतकर्ता इस अदालत के समक्ष निष्पादन दायर करने के लिए स्वतंत्र होगा।  


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