संत सीचेवाल के प्रयासों से ओमान से लौटी युवती ने किए खुलासे ....
- पड़ोसी देशों की लड़कियां 1350 रियाल में बेची जा रही
- सोने का कोई समय नहीं, लेकिन सुबह तड़के पड़ता था उठना
खबरनामा इंडिया ब्यूरो। कपूरथला
अरब देशों में नौकरी का सपना दिखाकर ले जाई जा रही भारतीय बेटियों की दर्दनाक हकीकत एक बार फिर सामने आई है। जालंधर जिले की एक युवती, जो ट्रैवल एजेंटों के जाल में फंसकर पहले दुबई और फिर मस्कट पहुंच गई थी, राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों से सुरक्षित अपने घर लौट आई है। परिवार के सदस्यों ने संत सीचेवाल का धन्यवाद करते हुए बताया कि जब तक उनकी बेटी वापस घर नहीं आ गई थी, तब तक उनकी जान सांसत में फंसी हुई थी।
वापस लौटी पीड़ित युवती ने जो खुलासे किए हैं, वे मानव तस्करी के खतरनाक रूप को उजागर करते हैं। उसने बताया कि मस्कट में उसने नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और भारत की कई लड़कियों को बेहद खराब परिस्थितियों में देखा। उसका दावा है कि वहां लड़कियों को 1200 से 1350 रियाल तक की रकम के बदले एक मालिक से दूसरे मालिक को बेचा जा रहा है।
पीड़ित युवती ने बताया कि वह 14 फरवरी को अपने गांव की एक लड़की के माध्यम से सुनहरे भविष्य की उम्मीद लेकर दुबई के लिए रवाना हुई थी। उसे वहां अच्छा काम और 40 हजार रुपये मासिक वेतन देने का वादा किया गया था। लेकिन दुबई पहुंचने के बाद ट्रैवल एजेंटों ने उसे एक महीने तक वहां रखने के बाद मस्कट भेज दिया। वहां उससे घरेलू काम सुबह तड़के से लेकर देर रात तक करवाया जाता था। न सोने का कोई निश्चित समय था और न ही आराम का अवसर। सुबह पांच बजे से पहले उठना अनिवार्य था।
उसने बताया कि जब भी उसने भारत वापस लौटने की इच्छा जताई, उसके साथ सख्त व्यवहार किया जाता और मारपीट भी की जाती थी। परिवार से बात करने के लिए केवल 20 मिनट का समय दिया जाता था। उसने बताया कि जिस कार्यालय में उसे बंधक बनाकर रखा गया था, वहां कई लड़कियां अपने परिवारों और बच्चों को याद करके रोती रहती थीं और उनकी एक ही इच्छा होती थी कि किसी तरह अपने देश वापस पहुंच जाएं।
पीड़िता के परिवार ने बताया कि 4 जून को उन्होंने संत बलबीर सिंह सीचेवाल से मदद की गुहार लगाई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तुरंत विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से संपर्क किया, जिसके परिणामस्वरूप युवती 14 जून को सुरक्षित अपने वतन लौट आई।
इस अवसर पर संत सीचेवाल ने कहा कि अरब देशों में बेटियों से जुड़े ऐसे मामले बेहद चिंताजनक हैं और मानव तस्करी के इस गैरकानूनी नेटवर्क पर तत्काल रोक लगाने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि विदेश में नौकरी के लालच में आने से पहले एजेंटों और कंपनियों की पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें, ताकि कोई अन्य बेटी ऐसे अंधेरे और दर्दनाक हालात का शिकार न बने।
वापस लौटी पीड़ित युवती ने बताया कि वहां पहुंचने के बाद लड़कियों के पासपोर्ट और दस्तावेज छीन लिए जाते हैं और उनसे सुबह से आधी रात तक काम करवाया जाता है। उन्हें घरों या कार्यालयों में एक तरह से कैद करके रखा जाता है। न आराम करने की अनुमति होती है और न ही बाहर जाने की। कई लड़कियों को यह तक नहीं पता होता कि वे किस इलाके या शहर में हैं। विभिन्न देशों की लड़कियां अपने परिवारों से दूर एक जैसी पीड़ा झेल रही थीं। उन्हें पैसों के बदले एक मालिक से दूसरे मालिक के पास भेज दिया जाता था और घर वापस जाने की बात करने पर मारपीट, पैसों की मांग या सख्त व्यवहार का सामना करना पड़ता था।



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